सोमवार, 29 जुलाई 2013

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान।

मर्यादा पुरुषोतम श्री राम का चरित्र हम सभी सनातन   धर्मावलंबियो के लिए अनुकरणीय है।  भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के मर्यादा पुरषोतम बनने  की कहानी भी कुछ कम प्रेरणा दायक नहीं है।  हमारी आज की युवा पीढ़ी अपने धर्म से विमुख होकर पाश्चात्य सभ्यता के पीछे ऐसे भाग रही है जैसे घुड़ दौड़ हो रहा हो और उसमे कही ये पीछे ना छुट जाये लेकिन आज  जितनी भी सभ्यता या संस्कृति हिंदुस्तान में पनपी है उनका मूल सनातन संस्कृति है सायद इस बात से हमारी नई  पीढ़ी अनभिज्ञ है यहाँ जरुरत है हम सभी संस्कृतियो और सभ्यता से अच्छा कुछ सीखे लेकिन अच्छी बातो को ना की बुराई  को।  आज की युवा पीढ़ी मर्यादा पुरषोतम राम के चरित्र उनके अन्दर के त्याग सयम समर्पण से लगभग अनभिज्ञ है जिसकी वजह से अन्य धर्मो को मानने वाले अपने अपने ढग से श्री राम के  चरित्र का वर्णन करते है यहाँ तक की कुछ लोग स्वार्थ की वजह से बेहद शर्म नाक टिपण्णी भी करते है और हम मूकदर्शक हो सुनते रहते है क्योकि हमें हमारे परिवार में इस प्रकार की शिक्षा ही नहीं दी गई हमारे परिवार वालो ने हमें अंग्रेजी पढ़ना उचित समझा ताकि हमें बेहतर रोजगार प्राप्त हो सके जिसका नतीजा हुआ की हम स्वयं  के धर्म से विमुख होते गए हमारे बच्चे ओ गॉड , मोम , डैड बोल कर खुश हुए और हम यह सुन  कर, लेकिन इसी अंग्रेजियत ने जब बूढ़े हुए तब रंग दिखाया बच्चे ने जब माता पिता को वृद्ध आश्रम में भेज दिया लेकिन यदि हम अपने बच्चो को जन्म काल से ही अंग्रेजियत के साथ साथ अपने सत्य सनातन धर्म से परिचित करवाते तो सायद ऐसा नहीं होता।   आज लगभग हिन्दू परिवारों में यह देखने को मिल जायेगा जो की चिंता का विषय है।  हमारी संस्कृति और सभ्यता पर जितना प्रहार विदेशी आक्रंताओ ने नहीं किया उससे कही अधिक हमने स्वयं किया है।  आज श्री राम के चरित्र से हमें कुछ सिखने के आवश्यकता ताकि हम अपने धर्म की रक्षा कर सके।  श्री राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा का पालन करते हुए  ताड़का राक्षसी का वध किया , पुत्र  धर्म का पालन करते हुए  वन प्रस्थान किया   जबकि  वो चाहते तो पिता की आज्ञा का उलंघन कर सकते थे ।  प्रजा की बात मान कर पत्नी सीता तक का त्याग कर दिया ताकि एक कुशल प्रसाशक कहलाये । ऐसे है श्री राम चन्द्र जी जिनका गुण गान करके राक्षस कुल में जन्मे विभीषण का उद्धार हो जाता है हम तो मानव योनि में जन्मे है यदि रघुनायक का गुण गान करे तो हमारा क्या कल्याण नहीं होगा आज  की युवा पीढ़ी को समझना चाहिए।  
सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान। 
सादर सुनहि ते तरहि भव सिंधु  बिना जलजान।। 

मोह मूल सुल प्रद त्यागहु तम अभिमान। 
भजहु राम रघुनायक कृपा सिन्धु भगवान।। …… शिया वर राम चन्द्र की जय। 
                                                                           पवन पुत्र हनुमान की जय।        

रविवार, 30 जून 2013

श्री राम जन्म भूमि संघर्ष गाथा ?


राज सत्ता के लिए भले ही राम जन्म भूमि और मंदिर कोई स्थान ना रखता हो लेकिन भगवन राम हमारे आराध्य है और रहेंगे भगवन राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बने यह देश के करोडो हिन्दुओ की मांग हमेसा से रही है और आगे भी रहेगी क्योकि यह हमारी आस्था का प्रतिक है यही नहीं
हमारे पूर्वजो ने भी कभी राम मंदिर पर अपना दावा कमजोर नहीं होने दिया .१५२८ में बाबर की अनुमति से मीर बाकी ने मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनवाई लेकिन अयोध्या में रहने वाले हिंदू कभी हार नहीं माने तब से ही उन्होंने अपना विरोध जारी रखा इतिहास कारो के अनुसार 1534 इसवी में अयोध्या में पहला दंगा हुआ और कई गुम्बजो को तोड़ दिया गया उसके बाद मुश्लामानो ने यहाँ नमाज अता करनी बंद कर दी .बाबर के बाद औरंगजेब का इस इलाके में मृत्यु पर्यंत कब्ज़ा बरक़रार रहा लेकिन विवाद कम नहीं हुआ था
१५३० से १५५६ इसवी तक हुमायु के साशन काल में दस बार युद्ध यहाँ  हुए एक महिला रानी जय राज कुमारी तथा स्वामी महेस्वरानंद ने बार बार विधर्मियो को छट्टी का दूध याद दिलाया लेकिन अंतत पहले स्वामी महेस्वरानंद और बाद में रानी साहिबा सहीद हो गई ?क्या इतिहास इनकी सहादत को कभी भुला सकता है /
१७३४ इसवी में मुह्हमद सहादत साह गद्दी पर बैठा तब बुरहान उन मुल्क सादत अली खान अवध का गवर्नर बना उसके साशन काल में पुन्ह हिन्दुओ ने राम जन्म भूमि पर अपना दावा किया .इतिहाश कारो के अनुसार यही सबसे पहला मुकदमा ज्ञात हुआ है .१७६३ से १८३६ तक ५ बार अमेठी के राजा गुरु दत्त सिंह और पिपरा के राजा राज कुमार सिंह के नेतृत्व में मुग़ल सल्तनत को चुनौती दी गई तब जा कर मुगलिया सल्तनत ने हिन्दुओ से हार मानते हुए यहाँ पूजा और नमाज दोनों की मंजूरी प्रदान की तत्पश्चात हमारे रन बाकुरो ने यहाँ पूजा आरम्भ तो करवा दिया लेकिन उनकी मांग यही रही की मस्जिद को पूरी तरह हटाया जाय और ऐसा उन्होंने किया भी इस दौरान चार बार युद्ध हुए जो की बाबा उद्धव दास और भाटी नरेश के नेतृत्व में लड़े गए हार मान कर नबाब वाजिद अली साह ने तीन सद्शिया कमिटी का गठन किया गया जिसमे एक मुश्लिम और एक हिन्दू और तीसरा ईस्ट इंडिया कंपनी का मुलाजिम थे जिसमे यह बात सामने आई की मीर बाकी ने मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनवाई लेकिन दुर्भाग्य से १८५६ में अंग्रेजो का अवध पर कब्ज़ा हो गया और अंग्रेजो ने पुनः दोनों समुदाय को यहाँ पूजा और नमाज की अनुमति दे दी लेकिन गौर करने वाली बात है की हजारो प्रायशो के बाद भी हमारे पूर्वजो ने यहाँ पूजा अर्चना कभी बंद नहीं की १८५७ इसवी जहा स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए भी महत्वपूर्ण तारीख थी और स्वतंत्रता हेतु आवाज बुलंद हो चुकी थी वही राम जन्म भूमि भी ऐतिहासिक स्थान रखता है क्योकि इसी साल बहादुर साह जफ़र और आमिर अली द्वारा राम जन्म भूमि स्थल हमें देने का निर्णय लिया गया और हिन्दुओ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बहादुर साह जफ़र को भारत का सम्राट घोषित कर दिया …………………………….
तमाम जानकारी अलग अलग इतिहाश कारो द्वारा लिखी गई पुस्तको से .
.शेष अगले भाग में

शुक्रवार, 28 जून 2013

आओ खेले एनकाउंटर की राजनीती ?

ऐसा लगता है की पुलिस और सुरक्षा बल के जवानो को अब अपराधियों से भिड़ने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना पड़ेगा की आतंकी या अपराधी हिन्दू है या मुश्लिम हिन्दू हुए तो ठीक उन्हें ठोक दिया जायेगा लेकिन कही भूल से वो मुश्लिम हो गए तो उन्हें राज्यों की पुलिस एन आई ए या सीबी आई के हवाले कर देगी एन आई ए उन्हें सोनिया और शिंदे तक ले जायेगा.गुनाह काबुल कर लिया तो ठीक नहीं तो उन्हें अखिलेश या नितीश या लालू के पास भेज दिया जायेगा मुआवजे के लिए आतंकियो को मुआवजे के साथ साथ नौकरी की भी पेश कश की जाएगी नौकरी लिया तो ठीक नहीं तो उन्हें मुआवजे के साथ जकिया जाफरी के पास भेज दिया जायेगा गवाह बना कर इस लिए सावधान ए देश के वीर जवानो तुम मरे तो कोई बात नहीं आतंकी नहीं मरना चाहिए तुम मरे तो १० लाख आतंकी मरा तो जिंदगी भर अदालत के चक्कर अब बोलो अदालत के चक्कर लगाना चाहते हो या आतंकियो के हाथो सहीद क्योकि केंद्र सरकार जिस प्रकार का राजनीती इशरत जहा मामले में कर रही है उससे तो ऐसा ही प्रतीत होता है सी बी आई और आई बी जैसी दो संवैधानिक संस्था आपस में भीड़ गई है और पूरा देश समझ रहा है की किसके इशारे पर सी बी आई ऐसा कदम उठा रही है गुजरात के मुख्या मंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो इन देश द्रोहियो ने पुरे मुडभेड से नरेन्द्र मोदी और अमित साह का नाम जोड़ दिया की उन्हें जानकारी थी क्या अब तक जितने भी आतंकियो की मौत हुई है कांग्रेस शाशित राज्यों के मुख्या मंत्रियो को इसकी जानकारी होती थी ?
और कहा जा रहा है की सी बी आई चार्जशीट में दोनों का नाम डाल सकती है .जबकि आजतक समाचार चैनेल ने विगत सप्ताह आतंकियो द्वारा की गई बात चित का टेप सार्वजनिक कर दिया था की इशरत और उनके साथियो की मंशा क्या थी .पिछले १५-२० वर्षो में आतंकी गतिविधिओ में सामिल सैकड़ो एनकाउंटर हुए और अधिकतर कांग्रेस साशित राज्यों में लेकिन इतना बबाल कभी नहीं मचा ना तो मीडिया ने ना ही केंद्र सरकार ने कभी इन मामलो की सुधि ली लेकिन छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ने का प्रयाश जिस प्रकार से किया जा रहा है क्या यह उचित है ऐसे में क्या पुलिस के जवान गुप्त सुचना के आधार पर कोई करवाई करने की हिम्मत दिखायेंगे ?

बुधवार, 19 जून 2013

कुर्सी केवल सत्य है बाकी सब असत्य है?

हमने धार्मिक ग्रंथो में पढ़ा और सुना की केवल राम नाम ही सत्य है लेकिन वर्त्तमान के नेताओ ने इन वाक्यों को झुट्लाते हुए पूरी कायनात की काया की पलट कर रख दी कल तक कांग्रेस की नीतिओ के धुर विरोधी बिहार के तथाकथित सेकुलर मुख्य मंत्री के जनाजे को अब कन्धा देने के लिए कांग्रेस के चार विधायक तैयार है .कल तक कांग्रेस की नीतिओ का विरोध करने वाले अब उन्ही के कंधो पर सवारी करने निकल पड़े है गौरतलब हो की नरेन्द्र मोदी को प्रचार अभियान का प्रमुख बनाये जाने के बाद नितीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ चुके है और १९ जून को विधान सभा में विस्वाश मत हासिल करेंगे वर्त्तमान में नितीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के पास ११८ विधायक है जबकि विस्वाश मत के लिए जादुई आकड़ा १२२ का है ४ विधायको की कमी कांग्रेस पूरा करने जा रही है बिहार विधान सभा में कांग्रेस के मात्र चार ही विधायक है .अगर हम बिहार की राजनीती की बात करे तो २०१० में बिहार की जनता ने एन डी ए को पूर्ण बहुमत प्रदान किया था और कांग्रेस और लालू रामविलाश की पार्टियो का जनता ने सूपड़ा समाप्त कर दिया था ये जनादेश बिहार की जनता ने कांग्रेस और अन्य दलों  की नीतिओ के खिलाफ दिया था लेकिन नितीश कुमार स्वार्थ की पराकाष्टा को पार करते हुए पुरे बिहार की जनादेश का ही अपमान कर डाला जिस नितीश कुमार ने २००३ में नरेन्द्र मोदी की तारीफों के पुल बंधते नहीं थकते थे वही नितीश कुमार अब नरेन्द्र मोदी के पक्के दुश्मन बन बैठे लेकिन नितीश को आडवानी से कोई दुश्मनी नहीं है आखिर ये कैसी धर्म निरपेक्षता है की एक पार्टी के एक नेता स्वीकार है और दुसरे नेता कतई स्वीकार नहीं है क्या इसका कोई जबाब नितीश कुमार बिहार की जनता को देंगे . यही नहीं १८ जून को भाजपा द्वारा आहूत बिहार बंद की सफलता को देख इन्होने अपने कार्यकर्ताओ को सड़क पर भाजपा कार्यकर्ताओ से मार पिट तक करने भेज दिया और ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीती के लिए कभी राम विलाश पासवान ने भी ऐसा ही किया था नतीजा आप लोगो ने भी देखा था जब उन्होंने बिहार में मुश्लिम मुख्य मंत्री बनाने के नाम पर खुद का है सिट नहीं बचा पाए थे अब नितीश कुमार भी उसी राह पर चल निकले है जहा प्रधान मंत्री उन्हें धर्मनिरपेक्षता का सर्टिफिकेट दे रहे है ऐसे समय में जब जनता भय भूख और अत्याचार से पीड़ित है और केंद्र की कांग्रेस नित सरकार को उखड फेकने का मन बना लिया हो वैसे समय में आप इस कदम को कितना जायज मानते है ?किर्पया जरुर बताये 

रविवार, 16 जून 2013

बिहार के सेकुलर मुख्य मंत्री के 3 काले कारनामे ?

आइये जानते है बिहार के मुख्य मंत्री नितीश कुमार के 3  काले कारनामे ?

नितीश जी के कारनामे नंबर --१ 
बात २००९ लोक सभा चुनाव की है जब ७८ प्रतिशत अल्पसंख्यक बहुल किशनगंज जिले की लोक सभा सीट कुछ स्वार्थी भाजपा नेताओ की वजह से गटबंधन के तहत जे डी यू के खाते में चली गई .जबकि नितीश जी की पार्टी का यहाँ कोई जनाधार तक नहीं था और इनके जिला अध्यक्ष भी बेचार बकलोल टाइप नेता थे मुश्लिम तुष्टिकरण की निति के तहत इन्होने सीट तो ले ली लेकिन उमीदवार ढूंढे नहीं मिल रहा था ऐसे में इन्होने उची कीमत लेकर ऐसे उम्मीदवार को टिकट दे दिया जो की बैंक का भगोड़ा था साथ ही इलाके में पशु तश्कर के नाम से कुख्यात था अब राष्ट्रवादियो ने निर्णय लिया गटबंधन जाये भांड में जे डी यु उम्मीदवार को हराना है सभी राष्ट्रवादी एक होकर सफल हुए और यहाँ से नितीश जी को मुह की खानी पड़ी ..बोलिए मिस्टर क्लीन ...............रहे ?

नितीश जी के कारनामे नंबर --2 
बिहार के विकाश की बार बार चर्चा अखबारों में होती है लेकिन नितीश जी के मुख्य मंत्री रहते आज तक  एक भी फैक्ट्री बिहार में नहीं खुली लेकिन इन्होने भारत नेपाल सीमा से सटे  अररिया जिले के सिमराहा प्रखंड में मांस फैक्ट्री का लाइसेंस प्रदान कर दिया गौरतलब हो की इनके रहते बिहार में बड़े पैमाने पर पशु धन की तश्करी नेपाल  और बांग्लादेश  दिन के उजाले में हुई जबकि पहले तश्कर रात का इंतजार करते थे .भाजपा और राष्ट्रवादी संगठनो के विरोध के बाद मांस फैक्ट्री का काम अभी बंद पड़ा है .........तो बोलिए ऐसे मुख्य मंत्री ..........रहे ? 


नितीश जी के कारनामे नंबर --३ 

मुश्लिम तुष्टिकरण निति के तहत नितीश कुमार ने अल्प संख्याओ को खुस करने के लिए जिले में अलीगढ मुश्लिम विश्विद्यालय के लिए २४७ एकड़ जमीन मात्र १ रूपये की लीज पर ९९ वर्षो के लिए दे दिया जबकि ये तमाम जमीन इंद्रा गाँधी ने वर्ष १९८३ में ही  आदिवाशियो को खेती करने और घर बना कर रहने के लिए दी थी .आदिवाशियो द्वारा विरोध  करने पर ४९  गरीब और निरीह आदिवाशियो के ऊपर जबरन मुकदमा कर दिया और कई आदिवाशियो को जेल के अन्दर भी डाल दिया गया इनकी मदत करने वाले राष्ट्रवादियो के ऊपर भी फर्जी मुकदमा कर दिया गया यहाँ तक की वन्वाशी कल्याण आश्रम के नेता २ महीने तक जेल में रहे यही नहीं राज्य अनुसूचित जाती जनजाति के अध्यक्ष बाबू लाल मुर्मू तक के ऊपर इन्होने मुकदमा कर दिया .पटना में विरोध कर रहे विद्यार्थी परिषद् नेताओ के ऊपर पुलिस ने दमनात्मक करवाई की लेकिन इन्होने इस सीमावर्ती जिले के अल्पसंख्यक हिन्दुओ की एक नहीं सुनी सिर्फ वोट की लालच में एकतरफा करवाई करते रहे वही वर्षो से गर्मी बरसात की मार झेल रहे सस्त्र सीमा बल (ssb  )को आज तक जमीन नहीं दी गई .....बोलिए ऐसे धर्म निरपेक्ष नेता का क्या किया जाये .अब विचार करना आप के हाथो में है क्या ऐसे नेता जनता का भला कर सकते है जिन्हें  सत्ता के लिए सिर्फ एक वर्ग 
.दिखाई देता है 

मंगलवार, 11 जून 2013

गुरु गुड चेला चीनी ?

जनसंघ और भाजपा के संस्थापको में से एक श्री लाल कृष्ण आडवानी जी ने भारतीय जनता पार्टी को शीर्ष स्थान पर पहुचने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसे कोई भुला नहीं सकता लेकिन नरेन्द्र मोदी के बढ़ते कद से आहात हो कर उन्होंने जिस प्रकार पार्टी के सभी प्रमुख पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है इसे भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है जिस व्यक्ति को आज परिवार में बुजुर्ग की तरह छोटो को राह दिखानी चाहिए वही व्यक्ति कुर्शी की चाहत में अपने ही बनाये घर को उजाड़ने के प्रयास में लग गया .आज जब सम्पूर्ण भारत कांग्रेस के भ्रस्ताचार से मुक्ति पाना चाहता है और भाजपा को विकल्प के रूप में देख रहा है ऐसे समय में आडवानी जी के इस्तीफे को कोई भी राष्टवादी व्यक्ति सही नहीं कहेगा आखिर इतनी दरार क्यों पड़ गई आडवानी और पार्टी की मध्य यह भी विचारनीय प्रश्न है गौरतलब हो की यह उनका पहला इस्तीफा नहीं है यह उनका तीसरी बार दिया गया इस्तीफा है इससे पहले भी दो बार उन्होंने इस्तीफा दिया था लेकिन नेताओ के मानाने के बाद मान गए थे लेकिन इस बार अपनी हठधर्मिता पर अड़े हुए है २००९ के लोक सभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें प्रधान मंत्री पद का दावेदार घोषित किया लेकिन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा उसके बाद से ही आडवानी के विकल्प की तलास में पूरा संघ परिवार लगा हुआ था और धीरे धीरे विकल्प के रूप में नरेन्द्र मोदी उभरे लेकिन मोदी जिन्हें आडवानी ने ही मुख्या मंत्री की कुर्शी तक पहुचाया था और समय समय पर उनकी मदत भी करते रहते थे जब देखा की चेला चीनी बन रहा है तो बर्दास्त नहीं हुआ और विरोध करने लगे लेकिन संघ परिवार के युवा नेतृत्व की आवश्यकता ने आडवानी की दाल नहीं गलने दी और उनकी अनुपस्तिथि में ही मोदी को प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया जिससे आग बबूला हो आडवानी ने इस्तीफा दे दिया यहाँ आडवानी जी यह भूल गए की जो माली वृक्ष लगता है वो फल नहीं खा पाता .कृष्ण की तरह अर्जुन का सारथि बन कौरवो का नाश करे आडवानी जिससे इतिहाश के पन्नो में उनका नाम दर्ज हो ना की गुरु द्रोणाचार्य की तरह सिष्य की ऊँगली ही गुरु दक्षिणा स्वरुप मांग ले .साथ ही स्वार्थ की पराकाष्टा को पार करने की पीछे और भी अन्य कारन हो सकते है जिसकी जाच भी होनी चाहिए यदि पार्टी नेताओ द्वारा आडवानी की कही अनदेखी की गई जिससे वो आहात है तो उसमे भी सुधर किया जाना चाहिए प्रासंगिकता आज भी भाजपा में एक बुजुर्ग नेता की हैसियत से रहनी चाहिए जो की परिवार के बच्चो को दिशा दे क्योकि एक समय के बाद जब बच्चे बड़े हो जाते है तो बुजुर्ग ही उन्हें सही राह दिखाते है आडवानी जी को बच्चो की तरह हठ नहीं करना चाहिए उन्हें नरेन्द्र मोदी को आशीर्वाद देना चाहिए ताकि इस देश से कांग्रेस रूपी विष बेल को समाप्त किया जा सके .

गुरुवार, 6 जून 2013

मोदी मस्त नितीश पस्त ?


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गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर से नितीश कुमार पर भारी पड़े है .जब जब नितीश कुमार द्वारा मोदी का विरोध किया जाता है तब तब नरेन्द्र अपनी स्वीकारिता भारतीय राजनितिक मानचित्र पर छोड़ने मे सफल रहते है वही नितीश कुमार को मुह की खानी पड़ती है बुधवार को लोक सभा और विधान सभा उप चुनाव के परिणाम ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया की मोदी का विरोध नितीश को भारी पड़ेगा तो क्या नितीश को मोदी से हाथ मिला लेना चाहिए ?बिहार के महाराजगंज उप चुनाव में जिस प्रकार से जनता दल यू उमीदवार पी.के साही की हार हुई इससे तो यही प्रतीत होता है की मोदी का विरोध यहाँ भारी पड़ा और भाजपा के मतों का भी धुर्विकरण राजद उम्मीदवार प्रभुनाथ सिंह के तरफ हुआ है .प्रभुनाथ सिंह ने १ लाख ३७ हजार मतों से जीत दर्ज की जो की सीधे सीधे मतदाताओ के मूड को दर्शाता है की नितीश के प्रति जनता में कितना गुस्सा व्यापत है .विगत कुछ दिनों से अल्पसंख्यक वोट को अपने खेमे में करने के लिए नितीश कुमार सारे तिकड़म अपना चुके है लेकिन उसके बाबजूद भी बिहार के अल्पसंख्यक मतदाताओ में नितीश के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं है गौरतलब हो की बिहार के 38 ज़िलों में से मात्र एक ज़िला (किशनगंज 78% मुस्लिम आबादी) मुस्लिम बहुल है. तीन और ज़िले कटिहार 43%, अररिया 41% और पूर्णिया 37% ऐसे हैं जहां मुस्लिम मत लोकसभा प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करने की कूवत रखते हैं. लेकिन अन्य जिलो में मात्र ३ -४ प्रतिशत मुश्लिम मतदाता है .मालूम हो की मोदी के विरोध के बाद भी नितीश को किशनगंज के मुश्लिमो ने नकार दिया था और यहाँ भी उनका खाता नहीं खुला था लोजपा से जीत कर आये नौसाद आलम को इन्होने अपनी पार्टी में सामिल करवा कर अपनी जमीन तैयार करने की कोशिश की वही यदि नरेन्द्र मोदी की स्वीकारिता की बात करे तो गुजरात उप चुनाव में जिस प्रकार का प्रदर्शन किया और लोक सभा की २ सीट और विधान सभा की चार सीट पर अपना कब्ज़ा जमा कर यह सिद्ध कर दिया है की देश की १२१ करोड़ जनता को साथ ले कर चलने की कुब्बत मोदी रखते है चाहे कोई लाख विरोध करे जिसे आगे बढ़ना है वो आगे ही बढेगा उसे कोई रोक नहीं सकता .परिणामो के बाद एक बार पुन्ह मंथन का दौर आरम्भ हो चूका है सायद नितीश कुमार भी आत्म चिंतन करे की उन्हें नरेन्द्र भाई से हाथ मिला लेना चाहिए अन्यथा सायद बिहार की जनता ने अपना मूड बना लिया है ये वही बिहार की जनता है जिसने लालू द्वारा आडवानी के रथ को रोके जाने के बाद लालू को हासिये पर पंहुचा दिया था कही मोदी का रथ रोकने पर नितीश भी हासिये पर ना चले जाये .

बुधवार, 29 मई 2013

क्या इसे माँ कहेंगे ?

केतकी का भरा पूरा परिवार था एक बेटा २ बेटिया कही से कोई दुःख नहीं था केतकी को . पति सुन्दर दास भी अपने परिवार के भरण पोषण के लायक कमा लेते थे लेकिन केतकी पड़ोसिओ के रहन सहन को देख कर मन ही मन कुढती रहती क्योकि बचपन से ही आभाव में पली थी और विवाह के बाद भी आभाव ने उसका पीछा नहीं छोड़ा था केतकी के सपने मन ही मन हिलोरे मरते रहते लेकिन वो कुछ कर नहीं पा रही थी दिन बिताते गए बच्चे भी बड़े हो गए बड़ी बेटी शीतल जहा अपने पैरो पर खड़ी हो चुकी थी वही दूसरी बेटी माया और बेटा पंकज कॉलेज में पढाई कर रहे थे इसी बीच शीतल को गौरव नाम के एक लड़के से प्यार हो गया गौरव काफी पैसे वाला था और उसके माँ बाप की पहले ही मौत हो चुकी थी शीतल ने एक दिन अपने प्यार की बात अपनी माँ केतकी को बताई तो माँ का रोना आरम्भ हो गया की गौरव काफी पैसे वाला है हमारी हैसियत नहीं है उसकी बराबरी करने की और ना जाने क्या क्या लेकिन अन्दर ही अन्दर केतकी खुद के सपनो को पूरा करने का ताना बाना बुनने लगी गौरव को घर पर बुला लिया और गौरव से कहने लगी देखो बेटा हमारी हैसियत नहीं है तुम्हारी बराबरी करने की गौरव बेचारा सीधा साधा नौजवान था केतकी ने जो कहा वो सब पर तैयार हो गया केतकी ने गौरव को बड़ा सा लिस्ट थमा दिया टीवी फ्रिज ए सी और ना जाने क्या क्या उसके बाद गौरव और शीतल परिणय सूत्र में बंध गए लेकिन दिन प्रति दिन केतकी की डिमांड बढती जा रही थी बेचारा सीधा साधा गौरव केतकी की मांग पूरी करता रहा वो भी बिना शीतल की जानकारी के केतकी के पति सुन्दर दास को भी ये सब बहुत बुरा लग रहा था लेकिन पत्नी के आगे उनकी एक ना चलती ऐसे में एक दिन शीतल को अपनी माँ के करतूतों का पता चल गया उसने माँ को खूब खरी खोटी सुनाई लेकिन केतकी की आँखों पर तो लालच का पर्दा चढ़ा था शीतल को ही डाट दिया और धमकी दी की यदि तुमने गौरव को कुछ कहा तो तुम्हारा तलाक करवा दूंगी और कहूँगी की तुम ने गौरव को फसाया था बेचारी शीतल खुद को बर्बाद होते हुए देख रही थी और उधर केतकी की डिमांड बढती जा रही थी गौरव भी केतकी की डिमांड पूरा करता जा रहा था लेकिन अब शीतल से यह सब देखा नहीं जा रहा था क्योकि अब शीतल भी गर्ववती हो चुकी थी और उसे भी अपने बच्चे का भविष्य नजर आ रहा था एक दिन शीतल ने गौरव को माँ की धमकी वाली बात बता दी और आइन्दा रुपया ना देने की गुजारिश गौरव से की इसी बीच २ -३ दिन बीत गए केतकी ने नया ड्रामा किया और पहुच गई गौरव के ऑफिस में गौरव से अपनी गलतियो के लिए माफ़ी माँगा और अपनी दूसरी बेटी अपर्णा को अपने ऑफिस में नौकरी देने की मिन्नतें करने लगी गौरव बेचारा फिर से केतकी की बातो में फस गया और अपर्णा को अपने ऑफिस में नौकरी दे दी केतकी का चाल सफल हो चूका था केतकी ने अपनी बेटी अपर्णा को समझाया की गौरव को तुम्हे अपने रंग रूप के जाल में फ़साना है और शीतल की जगह लेना है बस अपर्णा ने गौरव पर डोरे डालना आरम्भ कर दिया लेकिन गौरव को ये काफी बुरा लगता था दिन बीत रहे थे एक दिन अपर्णा ने गौरव को रेस्टोरेंट में खाना खिलने की जिद की गौरव अपनी साली की बात मान कर चला गया रेस्टोरेंट में अपर्णा ने गौरव के ड्रिंक्स में नशीली दवा मिला दी जिससे गौरव बेहोश हो गया अपर्णा गौरव को अपने घर ले आई जहा केतकी और उसके बेटे पंकज ने मिल कर अपर्णा और गौरव की अश्लील फिल्म बना ली और दुबारा गौरव से 50 लाख रूपये की डिमांड कर दी नहीं तो मुकदमा करने की बात कही गौरव बेचारा डर गया १० लाख रूपये की एक क़िस्त दे दी सुन्दर दास जो की केतकी का पति था उसने भी यह देख लिया और उसने सारी शीतल को बतानी चाही केतकी अपने स्वार्थ में इतना आगे जा चुकी थी की उसने पंकज और अपर्णा को लेकर अपने ही पति सुन्दर दास का क़त्ल कर दिया और सारा आरोप अपनी बड़ी बेटी शीतल पर लगा दिया पुलिस ने शीतल को गिरफ्तार कर लिया अब बेचारा गौरव कही का ना रहा था ऐसे में वकील की मदत लेने की सोची गौरव ने सहर के जाने माने वकील के पास गौरव पंहुचा और अपनी आप बीती सुनाई वकील ने केतकी और उसके साथियो को उन्ही के जाल में फ़साने की सलाह दी और गौरव ने अपर्णा को अपने यहाँ बुलाया दोनों ने शराब पि और शराब के नसे में सारी कहानी अपर्णा ने गौरव को बोल दी जो की एक फिल्म बन चुकी थी गौरव और वकील साहब पुलिस के पास पहुचे और सारी फिल्म दिखाई पुलिस ने भी पूरी कहानी देखने के बाद केतकी अपर्णा और पंकज को गिरफ्तार कर लिया वही शीतल को छोड़ दिया गया यह तो थी क माँ के लालच की कहानी जिसने अपने ही स्वार्थ के चलते भरे पुरे परिवार का गला घोट दिया .क्या कहते है आप समाज में आज लालच की वजह से ऐसे हजारो कहानी मिल जाएगी जो की परिवार के मुखिया की लालच के कारन बर्बाद हो चुकी है इसी लिए तो कहते है लालच बुरी बला ?

मंगलवार, 21 मई 2013

सपा सरकार का खेल आतंकियो को मिल रहा बेल ?


समाज वादी पार्टी जब उत्तर प्रदेश में दुबारा सत्ता में आई तो आम जनता को उम्मीद थी की इस बार सत्ता की कमान मुल्ला मुलायम ने अखिलेश यादव जैसे युवा नेता को सौपी है उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकाश की राह में अग्रसर होगा किन्तु अखिलेश के सत्ता समहालने के अभी एक वर्ष और कुछ ही महीने हुए है सरकार का रंग रूप दोनों साफ झलकने लगा है मुश्लिम तुष्टिकरण की निति के तहत अखिलेश सरकार ने बिना शर्म राष्ट्र विरोधी गतिविधिओ में सामिल अपराधियो के मुक़दमे वापस लेने की घोषणा कर दी यही नहीं फैजाबाद सीरियल बम धमाको के आरोपी खालिद मुजाहिद को छुडवाने के सभी हतकंडे सरकार द्वारा अपनाये गए लेकिन ऊपर वाले की मार देखिये सारा खेल धरा का धरा रह गया और खालिद की मौत कोर्ट से वापस लाने के क्रम में हो गई वही दूसरा मामला मोह्हमद इक़बाल का है जो की हुजी का प्रमुख सद्श्य था और युवाओ को ट्रेनिंग देकर आतंकी बनाता था अदालती पत्रावली के अनुसार हूजी के आतंकी जलालुद्दीन उर्फ बाबू तथा नौशाद की गिरफ्तारी के बाद 23 जून 2007 को थाना वजीरगंज में रिपोर्ट दर्ज की गई थी और उसके बाद इक़बाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था यही नहीं सिविल कोर्ट कचेहरी लखनऊ में हुए बम विस्फोट के आरोपियों सहित सात आतंकियों पर चल रहा मुकदमा वापस लेने के लिए भी सपा सरकार ने अर्जी दी है साथ ही कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपी खालिद मुजाहिद की मौत के बाद अब सपा सरकार दूसरे अभियुक्त तारिक काजमी के विरुद्ध दर्ज मुकदमे की वापसी के लिए हाई कोर्ट में विशेष याचिका दायर करेगी। यह कदम बाराबंकी की न्यायालय से मुकदमा वापसी की शासन की सिफारिश खारिज होने के बाद उठाया जा रहा है। सोमवार को गृह सचिव आरएन उपाध्याय ने बताया कि कुल 29 मामलों में 15 मामलों में मुकदमा वापस लेने के लिए संबंधित अदालतों में अर्जी दी गई है। उन्होंने बताया कि दस वादों में निर्णय नहीं हो सका है, जबकि बाकी प्रकरण न्याय विभाग के पास विचाराधीन हैं। सपा सरकार ने जिन आरोपियों का मुकदमा वापस करने की पहल की है, उसमें वर्ष 2007 में गोरखपुर, फैजाबाद, वाराणसी व लखनऊ में हुए विस्फोट के आरोपी तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद का नाम प्रमुख है। इनके अलावा 2008 में रामपुर में सीआरपीएफ कैंप में हुए हमले के आरोपी जावेद उर्फ गुड्डू, ताज मुहम्मद और मकसूद का भी मुकदमा वापसी की सूची में शामिल हैं। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोपी नौशाद, याकूब और नासिर हुसैन के लखनऊ में चल रहे मामले को भी वापस लेने के लिए अर्जी विचाराधीन है। अहमद हसन उर्फ बाबू व शमीम की वाराणसी की अदालत, मुहम्मद कलीम अख्तर और अब्दुल मोइन की लखनऊ अदालत तथा अरशद, सितारा बेगम और इम्तेयाज अली की कानपुर नगर की अदालत में रिहाई के लिए सरकार ने अर्जी लगाई है।गौरतलब है कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद डॉ. रामगोपाल यादव ने रविवार को इटावा में मुस्लिम समाज द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा था कि पार्टी अब तक प्रदेश में 200 निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को जेलों से रिहा करा चुकी है और 400 मुस्लिमों से मुकदमे वापस हो चुके हैं। रामगोपाल कैसे कह सकते है ये निर्दोष थे यदि थे तो इन्हें फ़साने वाले पुलिस कर्मियों पर सरकार ने क्या करवाई की यदि नहीं की तो क्यों ?आखिर जब ऐसे ऐसे संगीन मामले इन लोगो पर दर्ज हो तब क्यों सरकार इनसे यह मुकदमा वापस लेना चाहती है सिर्फ एक वर्ग विशेष का वोट लेनेके लिए देश की सुरक्षा के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ ?
blast ka aaropi jalauddin
blast ka aaropi jalauddin
गौरतलब हो की इन बम विस्फोटो में सैकड़ो जाने गई सैकड़ो घर बर्बाद हुए बच्चे अनाथ हुए ,औरते विधवा हुई उन्हें इंसाफ कौन देगा क्या सरकार की उन परिवारों के प्रति कोई जिम्मेवारी नहीं है ? यह विचारनीय प्रश्न है यदि ये निर्दोष है तो न्यायलय सक्षम है इन्हें बाइज्जत बरी करने के लिए साथ ही ऐसे पुलिस वालो पर भी करवाई होना चाहिए जिन्होंने इन्हें निर्दोशो को बेवजह ऐसे मुकदमो में फसाया ?यहाँ सवाल यह उठता है की वोट बैंक की राजनीती के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने की इजाजत सरकार को किस ने दी साथ ही सरकार द्वारा उठाये गए ऐसे कदम से सुरक्षा बलों और पुलिस तंत्र का भी मनोबल टूटेगा .यही नहीं ऐसे निर्णयो से देश के मुसलमानों में भी भ्रम की स्तिथि उत्पन होगी की मुसलमान युवाओ को पुलिस बेवजह फसाती है और ऐसा देखा भी जा रहा है जब पुलिस किसी मुस्लिम युवक को गिरफ्तार करती है तो अब इसका मुखर विरोध होने लगा है लोग पुलिस पर सवालिया निसान खड़े करने लगे है मेरे विचार से समाज वादी पार्टी सरकार के ऐसे निर्णयो का पुरे देश में विरोध होना चाहिए ताकि कोई भी सरकार वोट बैंक की राजनीती के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की हिम्मत ना दिखाए .
अखिलेश यादव से भारत का आम नागरिक होने के नाते ५ सवाल ?
(१) क्या जिन आरोपिओ के मुक़दमे वापस लिए जा रहे है वो सभी निर्दोष है ?
(२) निर्दोष है तो ऐसे पुलिस वालो पर सरकार क्या करवाई कर रही है ?
(३) क्या मुकदमा वापस लेने से सुरक्षा बलों का मनोबल नहीं टूटेगा ?
(४) विस्फोटो में मारे गए नागरिको को न्याय कौन देगा ?
(५) नागरिको के पुनर्वास के लिए सपा सरकार ने क्या कदम उठाये है आज तक ?

रविवार, 12 मई 2013

खुस नसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है.


खुसनसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो उनकी यादो में ही जी रहा है
जिन हाथो के स्पर्श मात्र से ही रोम रोम पुलकित हो उठते थे
उन हाथो को ढूंढता फिर रहा हु कि तुम हो यही कही हो
जेठ कि तपती दुपहरी में आँचल में छुपा लेना तुम्हारा
कि कही से कोई किरण ना पड़ जाये मेरे चेहरे पर
कभी आँचल के कोरो से टपकते लार को पोछना
कभी ललाट पर पड़ आई सिकन को अपनी बाहों में समेट लेना
सब याद आता है आज लेकिन अब सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी यादे है
खुसनसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो बस तुम्हारी यादो में ही जी रहा हु
कभी सोचा ना था तुम यु हाथ छुड़ा कर चली जाओगी
अभी तो में अबोध था आखिर कौन सुलाएगा मुझे
हर अच्छे और बुरे से परिचित तुम्ही तो करवाती थी मुझे
कही से आता तो तुम्हे ढूंढता रहता तब तो एक आश थी कि
तुम हो यही कही हो
अब तो सिर्फ अनुभूतियो के सहारे
जिए जा रहा हु
खुस नसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो तुम्हारी याद में ही जिए जा रहा हु .
——————————- माँ तुम्हे सत सत नमन