शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

किश ऑफ़ लव - सामाजिक विकृति

भारतीय सभ्यता और संस्कृति का लोहा  पूरी दुनिया मानती आई है लेकिन हाल के दिनों में जिस प्रकार की घटना सामने आई उससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है की इस संस्कृति में कितनी विकृति आ गई है।  दक्षिण भारत के कोच्चि से निकली किश ऑफ़ लव की हवा देखते देखते कोलकाता होते हुए जब दिल्ली पहुंची तो तमाम बुद्धिजीविओ और समाज सुधारको को चुनौती देने वाली साबित हुई साथ ही यह सोचने पर भी बिबस किया की आखिर जिन संस्कारो की दुहाई वर्षो से हम अपने बच्चो को देने की बात करते रहे आखिर उसे देने में कहा कमी रह गई।  मामले के तह में जाये तो इस का आयोजन इस लिए किया गया था की एक प्रेमी जोड़े को कोच्चि में मौत के घाट उतार दिया गया था जिसके विरोध स्वरुप किश ऑफ़ लव का आयोजन किया गया था जिसे कही से जायज नहीं ठहराया जा सकता है ना तो उस प्रेमी जोड़े की हत्या की इजाजत दी जा सकती है और ना ही इस प्रकार के फूहड़पन फैलाते किश ऑफ़ लव जैसे आयोजन की क्योकि दोनों ही मामले पूरी तरह एक विकृत मानसिकता की परिचायक है। सोचने वाली बात यह है की  आखिर हमारे देश की युवा पीढ़ी इतनी उच्श्रृंखल क्यों हो गई की कि उसे अपने परम्पराओ अपने धर्म अपनी संस्कृति का जरा भी धयान नहीं रहा और इस प्रकार के कुकृत को बढ़ावा देने लगे कही ना कही यह हमारी शिक्षा पद्दति का दोष है क्योकि वर्षो से हम जिस शिक्षा पद्दति को ढो रहे है वो हमें शिक्षित तो कर रही है लेकिन उसके साथ ही हमारा नुकसान कही अधिक कर रही है। 

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

सोशल मीडिया कितना सोशल ?

सोशल मीडिया का पोस्टमार्टम करने का विचार मन में आया तत्पश्चात  लगभग 100 से अधिक युवक युवतियों  द्वारा संचालित  फेस बुक पेज का भ्रमण करने के बाद जो निष्कर्ष सामने आया उसके बाद कहा जा सकता है की भारतीय संस्कृति अपनी अंतिम साँस लेने के रास्ते पर बड़ी तेजी से बढ़ रही  है ? शीला की जवानी से लेकर रूपा के घाघरे का बखान हमारी युवा पीढ़ी बेहतरीन ढंग से करने को आतुर दिखती है इन पेजो की  नग्नता और फूहड़पन खुले आम दर्शाती है की कैसे युवाओ का नैतिक और चारित्रिक पतन हो रहा है।  युवा पीढ़ी के कंधो के सहारे 21 वि सदी में भारत को विश्व गुरु  बनाने का सपना संजोने वाले और संस्कृति की दुहाई देने वालो के नाक के निचे ही ये सारा खेल चल रहा है जहा आज की "युवती शाम होते ही कहती है की कौन  कौन मुझे सेक्स चैट करना चाहता है मेरे इनबॉक्स में जल्दी कमेंट करो उसके बाद जैसे लड़को की बाढ़  सी आ जाती है यह संख्या सैकड़ो या हजारो में होती तो शायद समझा जा सकता था की कुछ लोग होंगे लेकिन यह संख्या लाखो और करोड़ो में है जिनकी चाहत और दीवानगी का आलम यह है की इन्हे पेज पर यह कहते तनिक भी शर्म महसूस नहीं होता की उन्होंने अपने परिवार के किस सदस्य के साथ कितनी बार सेक्स किया है और उन्हें कैसा महसूस हुआ और वो परिवार के किस सदस्य के साथ सेक्स करने को आतुर है और उसके लिए सलाह भी मांगते है।  गौरतलब हो की वर्ष 1995 में इंटरनेट के प्रयोग को भारत में आम जनता के लिए आरम्भ किया गया था उस समय यह दुहाई दी गई थी की इसके प्रयोग से हम पुरे विश्व से विचारो का आदान प्रदान कर सकेंगे लेकिन हुआ इसके विपरीत कुछ ने इसे अपने कार्यो के लिए इस्तेमाल किया लेकिन अधिकांश जिनमे युवा पीढ़ी के साथ पौढ़ भी है ने इसे मात्र मनोरंजन का साधन समझा जहा हमें अच्छाई ग्रहण करना था हमने यूरोप और अमरीका की गन्दगी को अपनाने में अपनी बेहतरी समझी जिसका नतीजा है की  भोग वादी प्रवृति का हममे इस प्रकार से प्रवेश हो चूका  है की युवा पीढ़ी इसी को अपनी जिंदगी समझ रही है   और मनोरंजन के बहाने अपना चारित्रिक पतन कर रहे  है।  एक युवा होने के नाते यह कहते तनिक भी झिझक नहीं की इन अश्लील पेज और साइट को देख कर किसी की भी इच्छा जागृत हो जाये क्योकि  अश्लील साइट एक उत्प्रेरक का काम करते है और आज यह बीमारी का रूप ले रहे है जिसका नतीजा है की 3 साल की बच्चियां भी बलात्कार का शिकार हो रही है उसी देश में जहा नवरात्र में  कुँवारी पूजा का प्रावधान है। ऐसे में यदि अविलम्ब इनपर रोक नहीं लगाया जाता तो स्थिति और भी ख़राब होगी हा कुछ लोग होंगे हममे और आप में जिन्हे यह अच्छा नहीं लगेगा और कहेंगे की छोटे कपडे पहने से कुछ नहीं होता सोच बदलनी चाहिए। 

मंगलवार, 1 जुलाई 2014

मीडिया की आजादी संस्कृति के पतन की बड़ी वजह बन रही है ?

१९९५-१९९६ में   वैश्वीकरण ने अपने पाव भारत में फैलाना  आरम्भ किया इसके साथ ही भेड़ बकरियो की तरह समाचार चैनल बाजार में दिखने लगे क्योकि पुरे विश्व को भारत एक  उभरते हुए बाजार के रूप में दिखाई दे रहा था और इस बाजार  को आम जनमानस तक पहुँचाने  के लिए प्रचार प्रसार की आवश्यकता थी जिसका नतीजा हुआ की कुकुरमुत्ते की तरह समाचार चॅनेल बाजार में उग आये।  बड़े बड़े घरानो और नेताओ ने अन्य क्षेत्रो में निवेश से बेहतर मीडिया में निवेश को समझा क्योकि यहाँ खुले आम लूट की छूट थी कार्यपालिका से लेकर विधायिका तक में इसके द्वारा  पैठ  बनाना  बहुत ही आसान कार्य था साथ ही राजनितिक  आकाओ को खुस करने का भी यह एक बेहतर विकल्प था  जिसका नतीजा हुआ की इन मीडिया घरानो ने धन की लालच में भारतीय संस्कृति पर ही प्रहार करना आरम्भ कर दिया और आज ऐसी स्थिति पर ये पहुंच चुके है की बाजार से लेकर सभी क्षेत्रो पर इनकी पकड़ काफी मजबूत हो गई है अब ये जैसा चाहते है वैसा ही हो रहा है सरकार बनाने गिराने से लेकर कीमतों के निर्धारण पर भी इनकी पकड़ मजबूत हो गई है क्योकि विदेशी कंपनिया ऐसा ही चाहती है की  उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओ का विरोध ना हो . आज  अगर कोई लड़कियों के पहनावे पर सवाल उठाता है तो मीडिया उसके पीछे हाथ धो कर पड़ जाती है स्वास्थ्य मंत्री यदि कंडोम की उपयोगिता से अधिक भारतीय मूल्यों को तरजीह देने की बात करते है तो मीडिया उनपर दिन भर ट्रायल चलता है l क्योकि इन्हे लगता है की इनकी कमाई मार खायेगी  गौरतलब हो की इन मीडिया घरानो के आय का प्रमुख श्रोत आज   कामोत्तेजक  दवाई  और कंडोम जैसे विज्ञापनों के  प्रचार से प्राप्त हो रहा है ये पहले शराब का प्रचार कर कमाई करते है उसके बाद शराब छुड़ाने की दवाई का प्रचार कर इनके  दोनों  हाथ में लड्डू ही होता है  यह हम नीरा राडिया जैसे मामलो से समझ सकते है . यही नहीं इन्होने भारतीय संत परम्परा को भी कटघरे में खड़ा करने का कुत्षित प्रयाश कई मामलो में किया जिससे इनकी नियत को समझा जा सकता है .अब सवाल  उठाता है की भारतीय संस्कृति की अपनी गरिमा रही है मर्यादित आचरण को धेय मान कर ही हमारी संस्कृति फली फूली है पूरा विश्व हमारी संस्कृति का लोहा मानता रहा है लेकिन आज उसी संस्कृति पर क्षणिक लाभ की खातिर इनके द्वारा कुठराघात किया जा रहा है वो भी ऐसे समय में जब यूरोप और अमरीका हमारे आचरण को अंगीकार कर रहे हो वहा की लडकिया साड़ी को अपना प्रमुख वस्त्र बना रही हो और हिन्दुस्तानियो को  बिकनी के  तरजीह की सीख दी जा रही है क्या ये आस्चर्य का विषय  नहीं है .अब सवाल उठाता है की इन पर कैसे अंकुश लगाया जाये ताकि प्रेस की स्वतंत्रता का भी हनन ना हो और हमारी संस्कृति भी बची रहे इसके लिय हमें ही प्रयाश करना होगा सरकार पर दबाब बना कर हो या अन्य मार्गो से की इनके द्वारा प्रसारित विज्ञापनों के देख रेख के लिए एक ऐसे सांस्कृतिक  समूह का गठन किया जाये जिससे ये जो भी विज्ञापन का प्रसारण करे उससे पूर्व उस विज्ञापन की पूरी तरह जांचा परखा जाये उसके बाद ही प्रसारित किया जाये हलाकि नेशनल ब्रोडकास्ट एसोसिएशन जैसी संस्थाए मौजूद है लेकिन उनमे सिर्फ मीडिया घरानो के लोग ही है इसमें  जनता के चुने हुए  प्रतिनिधियों के साथ साथ सभी क्षेत्रो के सदस्य होने चाहिए जिससे यह समूह कारगर साबित हो और मीडिया घरानो की मनमाने रवैये पर रोक लग सके  ? हो सकता है अत्यधिकत उदारवादी और अंधी आधुनिकता के पैरोकारों को यह पसंद ना आये लेकिन अब बहुत कम समय बचा है इस विषय पर त्वरित करवाई की आवश्यकता जान पड़ती है .

शुक्रवार, 20 जून 2014

हंगामा है क्यों बरपा ?

भारतीय अर्थ व्यवस्था को मजबूत स्थिति प्रदान करने के  उद्देश्य से कड़े निर्णय की बात कह कर प्रधान  मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बजट से  पूर्व कड़ा  निर्णय  लेते हुए   रेल भाड़ा में बढ़ोतरी कर  दिया जिसे लेकर चहुंओर हंगामा मच गया  है।  लेकिन सवाल उठता है   जब आप अच्छे दिन की कामना रखते है तो उसके लिए कुछ त्याग भी करना पड़ेगा क्योकि चुनाव से पूर्व जब मोदी जी ने बुलेट ट्रैन चलाने की बात कि   थी तो आम जनमानस ने खूब तालिया बजाई थी अब यदि बुलेट ट्रैन को धरातल पर लाना है तो उसके लिए संसाधनो की आवश्यकता पड़ेगी जिसके  लिए  धन       चाहिए और वो धन मोदी जी अपने घर से तो लाएंगे नहीं हमारे और आप के सहयोग से ही योजनाओ को अमली जामा पहनाया जायेगा ? इस लिए धैर्य रखने की आवश्यकता है और कुछ पाने   के लिए कुछ  खोना पड़ता है यह क्यों भूल जाते है ? 

शनिवार, 24 मई 2014

शरीफ को न्योता ?

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करके नरेंद्र मोदी ने पुरे विश्व में भारतीय लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित करने के लिए अपने सपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशो के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करके एक नए अध्याय की सुरुआत की है जिसका दूरगामी असर निकट भविष्य में देखने को मिलेगा . गौरतलब हो की चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश पर श्री मोदी ने जम कर हमला किया था और कांग्रेस सरकार को भी आड़े हाथो लिया था की हमारे सैनिको के सर काटने वालो को सरकार बिरयानी खिला रही थी लेकिन जब सपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को निमंत्रण दिया गया तो ना सिर्फ विभिन्न पार्टीओ के नेता अचंभित हो गए वरन वैसे लोग भी अचंभित हुए जिन्होंने मोदी को यह सोच कर अपना मत दिया की पाकिस्तान को करारा जबाब यदि कोई दे सकता है तो वो सिर्फ मोदी दे सकते है लेकिन यहाँ इससे विपरीत हो रहा था ऐसे में पक्ष और विपक्ष होना लाजिमी है . नरेंद्र मोदी के ताजा बयानों का उल्लेख भी यहाँ आवश्यक है जिसमे उन्होंने कहा की पाकिस्तान और बांग्लादेश यदि लड़ना चाहते है तो गरीबी से लड़े .जिससे यह समझा जा सकता है के मोदी जी के मन में क्या है पाकिस्तान हमारा पडोसी है और हम पडोसी को बदल नहीं सकते यह सर्विदित है  लेकिन पडोसी को एक मौका सुधरने का जरूर दिया जाना चाहिए हलाकि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भी लाहोर बस यात्रा करके शांति का पाठ पढ़ाया था और समझौते भी हुए थे लेकिन उसका नतीजा हमें कारगिल के रूप में मिला था जिसवजह से आम जनमानस में आज भी पाकिस्तान के प्रति गुस्सा बरक़रार है लेकिन कूटनीतिक तौर पर देखा जाये तो   पाकिस्तान से अच्छे संबंध हो और दक्षिण एशिया के सभी देश सम्मिलित रूप से व्यापारिक नीति बनाये तो विश्व की अर्थ व्यवस्था पर हमारा जल्द ही कब्ज़ा होगा साथ ही आतंकवाद के खिलाफ भी साझा लड़ाई की आावश्यकता है जिससे भारत और पाकिस्तान दोनों पीड़ित है क्योकि पाकिस्तान में तालिबान ने अपनी पकड़ धीरे धीरे काफी मजबूत बना ली है और आई एस आई का सहयोग भी उसे प्राप्त हो रहा है हाफिज सईद जैसे आतंकी खुले आम नवाज के दौरे का विरोध कर रहे है और कश्मीर मुद्दे पर बेसुरा राग अलाप रहे है साथ ही आई एस आई भी शरीफ के भारत दौरे का विरोधी है जबकि ख़ुफ़िया सूत्रों की माने तो इंडियन मुजाहिद्दीन सिमी ने भी तालिबान से गठजोड़ करके नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की कोसिस आरम्भ कर दी है और पाक सीमा पर तालिबान आतंकियों को ट्रेनिंग भी दे रहा है और आई एस आई भी इसमें सहयोग कर रही है जो की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है की इसपर कैसे रोक लगाया जाये।  ऐसे में शरीफ को निमंत्रण देकर नरेंद्र मोदी ने जो जोखिम उठाया है  उसका असर अगर उल्टा पड़ा तो मोदी को नेपथ्य में जाते देर नहीं लगेगी .

शनिवार, 3 मई 2014

16 मई

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र मे लोकतंत्र का महापर्व अब समाप्त होने वाला है लोगो को अब इंतजार सिर्फ़  16 मई का है जब नतीजे सामने होंगे क्योकि  यह चुनाव भारत के भविष्य  का  निरधारण करने वाला साबित होने वाला  जिस कारण आम आदमी से लेकर अभिजात्य वर्ग कि भी निगाहे टिंकी हुए है कि आखिर परीणाम क्या निकलेगा।  लेकिन इससे अलग 16 वी लोकसभा के इस चुनाव मे परीणाम जो भी  आये कई बातों पर विचार करना आवश्यक है कि कैसे विभिन्न राजनीतिक दलों ने पुरे चुनाव को मुददा विहीन बनानें कि कोशिस की चुनाव से पुर्व जंहा महंगाई ,भरस्टाचार ,आतंकवाद ,सुरक्षा ,शिक्षा ,रोजगर जैसे मुद्दे हावी थे जैसे जैसे चुनाव बीतते गये सभी आवश्यक मुद्दे जो आम नागरिको के हितो से  जुड़ें हुए थे उन्हे स्वार्थ कि राजनीती कि  बलिवेदी पर चढ़ा दिया गया और उसके स्थान पर  जाति , धर्म आधारित राजनीति को प्राथमिकता  कि सूची मे रख कर चुनाव लड़ने कि कोसिस कि  जा रहीं है जिस वजह से आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगा है। कांग्रेस और  सहयोगी दल हर वो हटकंडा अपना रहे है जिससे कि वो सत्ता मे बने रहे विपक्ष के लिये  ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे है जो लोकतंत्र को शर्मशार करने वाली है ? धर्म विशेष के मतदाताओं को  लुभाने कि हर कोसिस इनके द्वारा कि जा रही है जिससे  आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई को भारी नुकसान पहुँच सकता है जबकि देश इन सबसे आगे निकलना चाहता है लेकिन इनकी सोच 2002 से आगे नहीं बढ़ रही है ये " विकास के मॉडल को टॉफी मॉडल तो  बताते है लेकिन इनका मॉडल क्या होगा इस पर ये चुप्पी साध लेते है "?  देश कांग्रेस के 10 वर्षो के कुशासन से बाहर निकलना चाहता है और यह बात सत्ता प्रतिष्ठान को बखूबी पता है जिस वजह से अब ये हर वो कदम उठा रहे है जो लोकतंत्र के लिये खतरनाक है और उसी परिपेक्ष मे जहा इन्होने असाम  के ताजा दंगो के लिये नरेन्द्र मोदी को दोषी ठहराने मे कोइ देर नही कि वंही मुख़्तार अंसारी जैसे माफिया डॉन से भी समर्थन स्वीकार कर लिया हलाकि इससे पूर्व जब लालू यादव जेल से निकले थे और दोनो पार्टियो मे गठबंधन हुआ था तभी यह पता चल गया था कि इनकी मंसा क्या है और ये चुनावी  वैतरणी कैसे पार करना चाहते है। लेकिन मतदाता अब जागरूक हो गये है और इन सबसे उपर उठ कर नये भारत के निर्माण मे अपनी भूमिका निर्धारित करने मे अपना योगदान बढ़ चढ कर दे रहे है जो कि बढ़ते हुए मतदान प्रतिशत से पता चलता है कि कैसे भीषण गर्मी मे भी मतदाता अपने घरो से निकल कर मतदान केन्द्र तक पहुच रहे है  अब इंतजार है तो सिर्फ़ 16 मई का जब बक्सा खुलेगा और एक नये भारत का निर्माण सुनिश्चित हो पायेगा।  

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

इदं लोकसभां स्वाह:।


21 फ़रवरी 2014 पर 06:10 अपराह्न


आज 15 वी लोकसभा का समापन सत्र था इस मौके पर  कांग्रेस नेताओ ने ऐसे ऐसे बोल बचन निकाले कि लगा इनके जैसा समाजसेवी कोई दुनिया में है ही नहीं भारत के असली भाग्य विधाता यही है राजनितिक सुचिता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि देख कर दंग रह जाना पड़ा लोकपाल बिल , तेलंगाना ,एंटी रैप बिल , स्ट्रीट भेंडर बिल जैसी उपलब्धियों का बखान किया गया लेकिन क्या देश कभी भूल सकता है कि इसी संसद ने और इनके मंत्रीओ ने धरती से आकाश तक घोटाले पर घोटाला किया , काला धन लाने के लिए संघर्ष कर रहे बाबा राम देव पर रात में हमला किया गया जिसमे बहन राज बाला मारी गई गैस और पेट्रोल कि कीमत को आसमान पर पहुचाया गया पाकिस्तान ने हमारे प्रधान मंत्री को देहाती औरत कि उपाधी से नवाजा खुले आम पाकिस्तानी सैनिक हमारे सैनिक का गला काट कर ले गए , देश कि सेना का एक बार नहीं कई बार मान मर्दन किया गया चीन ने अरुणाचल पर कब्ज़ा ज़माने कि अनगिनत कोशिश कि बांग्लादेश जैसा मुल्क भी गद्दारी करता रहा कश्मीर में तिरंगा फहराने से युवाओ को रोका गया लेकिन तिरंगा जलाने वाले आतंकिओं से वार्ता कि गई ऐसे सैकड़ो उपलब्धिया इस 15 वि लोकसभा कि है जिसे खाद्य सुरक्षा बिल के तहत मुफ्त में अनाज कि लालसा रखने वाले भूल सकते है लेकिन एक राष्ट्रवादी नहीं। ....... देश शर्वोपरी। 

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

गाँधी और नेहरु की लगाई आग में जल रहा है हिंदुस्तान ?

बात इसी बसंत पंचमी कि है जब पुरे बिहार में माता सरस्वती कि पूजा धूम धाम से मनाई जा रही थी छात्र छात्राए माता कि आराधना में लीन थे और उसके बाद गाजे बाजे के साथ माँ के विसर्जन कि तयारी चल रही थी लेकिन कोई नहीं जनता था कि १९४७ में द्वि राष्ट्र वाद के सिद्धांत पर जो समझौता हुआ उसका खामियाजा नई पीढ़ी को उठाना पड़ेगा पुरानी घटनाओ पर जाये तो विगत कुछ वर्षो में बिहार ,उत्तर प्रदेश , झारखण्ड सहित कई राज्यो के मुश्लिम बहुल इलाको में विभिन्य धार्मिक आयोजनो के बाद निकलने वाले सोभा यात्रा पर हमला आम बात हो गई है ऐसा ही कुछ इस बार बड़े पैमाने पर बिहार में देखने को इस बार मिला जहा विसर्जन में निकलने वाले जुलुश पर पथराव किया गया ,मार पिट कि गई यही नहीं गोलीबारी तक हो गई बिहार के अररिया मधेपुरा , फारबिसगंज ,सीतामढ़ी सहित कई इलाको में ऐसी घटनाये घटी जिसपर समय रहते काबू तो पा लिया गया लेकिन इन घटनाओ में जहा २ लोगो कि मौत हो गई वही ५० से अधिक लोग घायल हो गए आखिर ये क्या है ? क्या सहिष्णुता जैसे सब्द किसी एक वर्ग के लिए ही बनाये गए है या फिर हिन्दू मुश्लिम भाई भाई जैसे नारे देकर हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए गड्ढे खुद खोद रहे है क्योकि विगत वर्षो में जिस तरह के हालत देखने को मिल रहे है उससे तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है ? यह ठीक है कि भारत के सविधान ने सभी नागरिको को सामान रुप से अधिकार प्रदान किये है लेकिन इसका कितना पालन हो रहा है क्या उसपर चर्चा कि आवश्यकता नहीं वोट बैंक कि राजनीती के तहत हिन्दुओ को दोयम दर्जे का नागरिक बना कर रख दिया है नेताओ ने क्योकि हिन्दू कभी वोट बैंक नहीं बन पाये १९४७ के बाद से आज तक कश्मीर हो आसाम हो केरल हो सभी स्थानो पर बहुसंख्यक मुश्लिम वर्ग द्वारा हिन्दुओ का सोशन आम बात है गांधी और नेहरू क प्रेम ने ऐसी आग लगाई कि धर्म के आधार पर बटवारे के बाद भी आज तक शांति स्थापित नहीं हो पाई इस लिए अब खुले आम यह नारा लगाया जाता है “लड़ के लिए पाकिस्तान हस कर लेंगे हिंदुस्तान ” ? अब इसके बाद क्या नारा दिया जायेगा यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा .

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

क्या लालू और कांग्रेस पार्टी जबाब देगी ?

कांग्रेस हमेसा से चाहती थी कि देश टुकड़ो में विभाजित रहे ताकि वो सत्ता सुख भोगते रहे और यही हो रहा है जब देश में महंगाई भ्रटाचार गरीबी अशिक्षा आतंकवाद जैसे मुद्दे हावी हो रहे थे तो तत्काल राहुल गांधी ने सिख दंगो पर बहस छेड़ दी जिसका नतीजा हुआ कि गुजरात दंगो पर भी चर्चा चल निकली। साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर पर सवाल खड़े किये जाने लगे कांग्रेस नेता गुजरात दंगो कि बात करते है लेकिन गुजरात दंगो का कारन क्या था और गोधरा में कार सेवको कि हत्या किसने कि इस पर बात करने से कतराते है आखिर नानावटी आयोग कि जाच को ख़ारिज कर लालू प्रसाद यादव ने जिस सप्रंग 1 के दबाब में बनर्जी कमीसन को बनाया उसने कैसे सबूतो से खिलवाड़ किया इसका भी जबाब देश जानना चाहता है ? 2004 में कांग्रेस जैसे ही सत्ता में आई सबसे पहले उसने लालू प्रसाद यादव जो तत्कालीन रेल मंत्री थे पर दबाब बनवा कर गोधरा कांड के जाच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज उमेश चन्द्र बनर्जी के नेतृत्व में बनर्जी कमिसन बनवाया जिसने साबरमती ट्रैन में हुए कारसेवको कि मौत का कारन मानवीय भूल बताया। क्योकि हाजी बिलाल जो कि कांग्रेस नेता था उसे सजा से बचाना इनका मकसद था। गौरतलब हो कि गोधरा में 59 हिन्दुओ के मारे जाने के बाद ही गुजरात में दंगा भड़का था। उसके बाद कांग्रेस ने पोटा हटा दिया बाद में 17 मार्च 2002 को मुख्य संदिग्ध हाजी बिलाल , एक स्थानीय नगर पार्षद और एक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समर्थक को गोधरा में एक आतंकवाद विरोधी दस्ते ने गिरफ्तार कर लिया बिलाल ने भी गिरोह के नेता लतीफ के साथ पाकिस्तान में कई बार कराची का दौरा किया था वही कई आरोपी बंगाल के रास्ते बंगलादेश भागने में सफल हो गए थे ? कोर्ट ने बनर्जी कमीशन के बातो को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया और नानावटी साह कमीसन के जाच को तरजीह देते हुए फरवरी 2011 को निचली अदालत 31 लोगों को दोषी करार दिया और इस घटना को एक ” पूर्व नियोजित षड्यंत्र माना। राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ आरोपिओ को फासी देने कि मांग कि है ?क्या इसका जबाब कोई कांग्रेस नेता देगा कि क्यों आज तक गोधरा और सिख दंगो पर बचते फिरते है। बार बार दंगो के नाम पर मुश्लिम तुष्टिकरण कर वोट कि फसल काटने वाले किसी कांग्रेसी राजद सपाई बसपाई के पास इसका जबाब नहीं है ?

सोमवार, 20 जनवरी 2014

गणतंत्र के बहाने लोकतंत्र पर प्रहार ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर लिखने का मन तो नहीं करता लेकिन इनकी सच्चाई से देश दुनिया को अवगत करवाने के लिए लिखना पड़  रहा है। कुछ पुलिस वालो के तबादले को लेकर धरना पर बैठे केजरीवाल आम आदमी के ऐसे नेता है जो आम आदमी के नाम पर आराजकता फैला रहे है। 20 दिन के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा किये जा रहे धरने से पूरी दिल्ली में अराजकता का जिस प्रकार माहोल बना है उससे दिल्ली कि सुरक्षा भी खतरे में है। देश कि राजधानी पर आतंकी साया पहले से ही मडरा रही है उसपर सारी व्यवस्था धरना स्थल पर लगी हुई है वही केजरीवाल का ताजा बयान भी चौकाने वाला है जिसमे उन्होंने कहा है कि गणतंत्र दिवस नहीं मनाने देंगे जो कि इस बात का द्दोतक  है कि इन्हे लोकतंत्र पर विश्वाश है ही नहीं ये सिर्फ भारत कि अखंडता को खंडित करने में लगे है गणतत्र दिवश हम हिंदुस्तानिओं के लिए त्यौहार से कम नहीं है इस मौके पर पुरे विश्व से लोग दिल्ली पहुचते है जहा से हमारी संस्कृति हमारी विरासत कि झलक संपूर्ण विश्व पटल पर पहुचती  है लेकिन गणतत्र दिवस से ठीक पहले अपने मंत्रियो के बचाव में किये जा रहे इस कुकृत धरने से पूरी दिल्ली अशांत करने कि साजिश इन नेताओ द्वारा रची जा रही है ? यह ठीक है कि दिल्ली पुलिस को राज्य के अधीन होना चाहिए यह भी सच है कि पुलिस तंत्र में बड़े पैमाने पर भ्रस्टाचार कायम है लेकिन मुख्य मंत्री का पद केजरीवाल के पास है और इन मांगो को केजरीवाल विधान सभा में प्रस्ताव पारित करके भी मांग सकते है इसके लिए सड़क पर कि जा रही इस प्रकार कि नौटंकी ऐसे समय में जब अनेक देशो के प्रतिनिधि गंततंत्र दिवस में सामिल होने भारत आ रहे हो इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता।  फोर्ड और आवाज जैसी संस्थाओ से प्राप्त राशि के बल सड़क पर नेतागिरी कि दुकानदारी चला रहे केजरीवाल भारत कि गरिमा को धूमिल करने के प्रयास में लगे हुए है क्योकि धरना स्थल के करीब जिस प्रकार से  खाली  शराब कि बोतल मिली है इससे समझा जा सकता है कि इनके साथ कौन लोग है इनके मंत्री जहा  कश्मीर में जनमत सर्वेक्षण के बात कर पाकिस्तान  से बाहवाही लूटते है वही ये गणतत्र दिवस समारोह ना होने देने कि चेतावनी देते है संविधान कि कसम खा कर मुख्यमंत्री बने केजरीवाल संविधान कि गरिमा को तार तार करने में लगे हुए है जब मुख्य मंत्री धारा 144 तोड़ कर संविधान का उलंघन करे तो फिर जनता में क्या सन्देश जाता है ?आज इनकी वजह से दिल्ली के लाखो लोग परेसानी झेल रहे है जिस पुलिस वाले को दिन रात गाली दे रहे है उन्ही कि सुरक्षा घेरे में ये रात भर सोते  रहे  और बेचारे पुलिस वाले इनकी पहरेदारी में खड़े रहे क्या इन पुलिस वालो का मानवाधिकार नहीं है लेकिन सत्ता के मद में डूबे केजरीवाल को इसकी चिंता कतई नहीं है क्योकि इनका मकसद तो कुछ और ही है जो जल्द ही प्रकट होगा ?#aap