मंगलवार, 27 अगस्त 2013

रेपिस्टो का स्वर्ग भारत ?

बलात्कार हिन्दुस्तानियो के दिन चर्या में सामिल हो गया है प्रात:काल हाथो में आने वाले अख़बार में कभी तमाम देश दुनिया की समस्याओ से रु बरु होने का मौका मिलता था अब चाय की चुस्कियो के साथ साथ बलात्कार की खबरों से मुख्या पृष्ट भरा होता है समाचार चेनल के टिकर हो या हेड लाइन्स सभी २१वि सताब्दी में बलात्कार की खबरों से भरे पड़े है कही नाबालिग से बलात्कार कही मौलवी द्वारा अपनी शिष्या से बलात्कार तो कही संत द्वरा बलात्कार इन तमाम बलात्कार की खबरों को देख सुन और पढ़ कर पूरी दिन चर्या ही बदल सी गई है . अब  तो गली मुह्हाले से लेकर  चौक चौराहे की चाय दुकान हो या मॉल लोग बलात्कार पर ही चर्चा करते दिख जाते है .? कही ४ साल की बच्ची का बलात्कार १२ साल के लड़के द्वारा हो रहा है तो ७० साल की बुजुर्ग महिला भी अछूती नहीं रह रह गई है बलात्कारियो के लिए ऐसी स्थिथि पर अपना हिंदुस्तान पहुच गया है ? लेकिन जब बलात्कार के कारणों पर प्रबुद्ध जन चर्चा करते है और इससे बचने के उपाय बताते है तो बड़ा ही हास्यास्पद लगता है हो सकता है की आप मेरे बातो से सहमत ना हो पाए लेकिन वर्त्तमान में समाचार चेनलो पर जो बलात्कार को रोकने के लिए चर्चो का दौर चलता है और ४-५ लोग बैठ कर बड़ी बड़ी डींगे हाकते है की कठोर कानून बना दिया जाये बलात्कारी के लिए फासी की सजा मुक़र्रर की जाये से में खुद को अलग रख कर देखता हूँ ?आज भारत में जितने भी कानून बलात्कारियो के लिए है मेरे विचार से पूर्ण है ? सबसे पहले हमें आवश्यकता है की बलात्कारियो को बलात्कार के लिए उत्प्रेरक का काम करने वाले तत्वों की तलास करना और उन्हें जड़ से समाप्त करना तभी जा कर हम इस घिनौने काम पर रोक लगा सकते है ?  भूमंडली करण ने हिंदुस्तान को कुछ अच्छा दिया लेकिन उससे कही अधिक बुराई फैलाई है जिसे तथाकथित आधुनिक सोच वाले कतई मानने को तैयार नहीं है और जो आधुनिकता पर सवाल खड़े करते है उनका ये खिल्ली उड़ाने से बाज नहीं आते चाहे निर्भया मामले में संघ प्रमुख मोहन भगवत का बयान " की बलात्कार इंडिया में हो रहा है " या फिर अभी सपा नेता नरेश अगरवाल का यह बयान की "लडकियो को ढंग के कपडे पहने चाहिए " की जबरदस्त खिल्ली उड़ाई गई कोई यह मानने को तैयार नहीं है की हम जैसा देखते है वैसा ही सीखते है आज टी वी , सिनेमा ने जिस तरह अश्लीलता फैलाई है शिक्षा   पद्दति   में जितनी  गिरावट  आई  है की उसे मानने को ये तैयार नहीं है .छोटे  छोटे  बच्चे जब टी वी और इन्टरनेट पर शक्ति प्राश . और अन्य कमोतेजक विज्ञापन देखते है तो उनके मन में भी जिज्ञासा उत्पन होती है ? प्रकृति का नियम है की पुरुष का नारी के प्रति स्वाभाविक आकर्षण होगा . पुरुष नारी को देख कर उसके निकट आने की कोसिस हमेसा से करता रहा है और करता रहेगा इसी से सृष्टी चलती है पुरुष के अन्दर हमेसा नारी का सानिध्य प्राप्त करने की चाहत रही है और रहेगी ? आप मेरे विचारो से सहमत हो भी सकते और नहीं भी कहेंगे की पुराणी सोच वाला व्यक्ति है लेकिन यह सच्चाई है बाजार में बगल से गुजरने वाली महिला को १६ साल का जबान भी घूम कर देखता है और ६० साल का बुजुर्ग भी क्योकि नारी एक आकर्षण है और जो इस आकर्षण से बच निकलता है वो संत होता है जो में और आप नहीं है जब विस्वमित्र नहीं बचे तो हम क्या चीज़ है . अगर इस घिर्नित कार्य को रोकने की प्रबल इक्च्छा सब के मन में है तो अविलब आधुनिकता के साथ साथ नैतिकता पर धयन दे बच्चो को आधुनिक शिक्षा के साथ साथ संस्कार वान बनाये तभी बलात्कार की घटना रुक सकती है अन्यथा कितना भी सख्त से सख्त कानून बना ले कुछ होने वाला नहीं है आधुनिकता रूपी राक्षस सब समाप्त कर देगा ///////////////////////// बुरा लगे तो क्षमा करेंगे ?

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

14th अगस्त १९४७ ?

14th अगस्त १९४७ को सिर्फ दो मुल्को का बटवारा नहीं हुआ था यह बटवारा दो दिलो का भी था पाकिस्तान जहा खुद को एक मुश्लिम राष्ट्र घोषित कर चूका था वही हिंदुस्तान के नेताओ ने अपनी परम्परागत सहिष्णुता दिखाते हुए धर्मनिरपेक्षता की चादर ओढ़ कर हिन्दू और मुसलमानों को एक छत के निचे रखने की कोशिश की थी और नेहरु कबूतर उड़ा कर शांति का सन्देश देने में लगे थे ? x1km7bलेकिन इसका परिणाम आज भी देखने को मिल रहा है भले ही पाकिस्तान एक आजाद मुल्क है लेकिन आजादी के बाद भी पाकिस्तान के मन में हिंदुस्तान के प्रति द्वेष कम नहीं हुआ है आखिर ये द्वेष क्यों उत्पन हुआ ? जबकि जिन्नाह ने जो मांग भारत के समक्ष रखी थी उसे हमारे हुक्मरानों ने पूरी तरह मान लिया था ? बटवारा दो मुल्को का हो रहा था लेकिन लाशे दोनों और से बिछ रही थी जिन्ना ने नागरिको के मन में हिन्दुओ के प्रति ऐसी नफरत भरी थी की ट्रेन की बोगिओ में जिन्दा लोग कम और लाशे अधिक थी . imagesनफरत की ऐसी आंधी चलाई जिन्नाह ने की सब कुछ देखते देखते खाक हो गया .जिन्ना और नेहरु की लालच में लाखो नागरिक मारे गए और आज भी मारे जा रहे है जबकि जिन्ना ने कश्मीर हैदराबाद ,पंजाब को पाकिस्तान में मिलाने की पुरजोर कोशिश की थी लेकिन जिन्ना के झासे में ये रजवाड़े नहीं आये थे क्योकि इन्हें जिन्ना की नियत का पता चल गया था उसके वाबजूद १९४८ में पाकिस्तान ने हमला किया और उसे मुह की खानी पड़ी और ये सिलसिला अब तक चला आ रहा है चाहे १९६२ हो १९७१ हो या फिर कारगिल युद्ध लेकिन इन तमाम युधो में मुह की खाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधरा और आगे इसके सुधरने की उम्मीद भी नहीं है पाकिस्तान की लगाई आग में एक और जहा कश्मीर आज भी जल रहा है वही देश के अन्दर भी छद्म रूप से नफरत की आग फ़ैलाने की कोशिश पाकिस्तानी जेहादियो द्वारा की जा रही है और हिंदुस्तान के अन्दर भी आज एक तबका ऐसा मौजूद है जिसे पाकिस्तान से प्रेम है ? हमारे हुक्मरानों की वजह से यह संख्या दिन प्रति दिन बढती जा रही है जिसका नतीजा है देश में आये दिन होने वाले दंगे और बम विस्फोट क्योकि भले ही इन विस्फोटो के पीछे आई एस आई और अन्य आतंकी संगठनो के नाम सामने आते हो लेकिन आई एस आई या अन्य संगठन बिना भारतीय मदत के घटनाओ को अंजाम नहीं दे सकते ये कोई निरा बुद्धू भी बता देगा ? आये दिन देश को दहलाने की कोशिश आज भी जारी है तो क्या एक पाकिस्तान हिंदुस्तान में अब भी बसता है यदि हां तो हमारे हुक्मरान कहा सोये हुए है ?

रविवार, 11 अगस्त 2013

जम्मू में हिंसा - सरकार मौन

जम्मू कश्मीर के 8 जिले में कर्फू लगा हुआ है गौरतलब हो की किस्तवाड़ में ईद के दिन हुई हिंसा में सैकड़ो हिन्दुओ के घर और दुकानों को जला दिया गया था जिसके बाद प्रसाशन ने कर्फु लगा दिया लेकिन उसके बाद भी जम्मू की हालत बिगड़ी हुई है ? अभी तक हिंसा रोक पाने में जम्मू और केंद्र सर्कार विफल है जिसका नतीजा है की अभी तक दर्जनों मौते हो चुकी है ? केंद्र सरकार   हिन्दुओ के जान माल की रक्षा में पूरी तरह विफल है वही हालत का जायजा लेने जा रहे अरुण जेटली को भी जम्मू  सरकार ने जाने नहीं दिया ? ऐसा लगता है पर्दे के पीछे अल्प संख्यक हिन्दुओ के खिलाफ सरकार बड़ी साजिश कर रही है ? क्योकि  पाकिस्तान द्वारा भी फायरिंग की जा रही है साथ ही जमात उल दावा आतंकी हाफिज सईद ने स्वतंत्रता दिवस पर बम विस्फोट की धमकी दी है वही  गुजरात के समुद्री क्षेत्र से 13 आतंकियो के प्रवेश की सुचना पर हाई अलर्ट जारी  किया गया है  सरकार अविलम्ब वहा के हिन्दुओ के जान माल की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाये और दोषीओ के खिलाफ सख्त करवाई की जाये जिससे जम्मू कश्मीर के अल्प संख्यक हिन्दुओ के मानवाधिकारों की रक्षा हो सके ? 

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

आजाद भारत की गुलाम परम्परा ?

हिंदुस्तान अब आजाद है लेकिन में मानसिक रूप खुद को आज भी गुलाम समझता हूँ ? हमारी सभ्यता और संस्कृति अतुलनीय है और रहेगी इसमें कोई सक नहीं है लेकिन हमारी इसी सभ्यता और संस्कृति पर जिसने आघात किया उसका महिमामंडन यदि स्वतंत्र भारत में भी किया जाता रहे तो कही ना कही मन में यह ठेश पहुचती है की जिसने हमारे पूर्वजो पर अत्याचार किये उसी का महिमामंडन कर के हम क्या साबित करना चाहते है ?images जिसने जबरन हमारे बहु बेटियो पर अत्याचार किये जिसने दूध मुहे बच्चो को भी नहीं बक्सा और जलती हुई आग में फेक दिया जिन्होंने हजारो लोगो पर गोलिया चलवाई ? तोप में बांध कर जिन्दा मरवा दिया जिन्होंने हमारे पूर्वजो को दीवारों में चुनवा दिया हो लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी आज जब सड़को से गुजरते हुए उन नामो का बोर्ड नजर आता है तो मन में एक कसक सी उठती है गौरतलब हो की इतिहास कारो के अनुसार 715 A.डी में मोहमद बिन कासिम ने सर्वप्रथम काबुल पर हमला किया था और उसके बाद से ही यह सिलसिला आरंभ हुआ और ना जाने कितने आक्रंताओ ने हमारे ऊपर हमला किया जिनमे मोहम्मद गौरी , गजनी , क़ुतुब उद्दीन ऐबक ,जलालुद्दीन खिलजी , औरंगजेब ,अकबर आदि प्रमुख है जिन्होंने ना सिर्फ हमारी जमीन पर कब्ज़ा किया वरन संस्कृति पर भी गंभीर चोट पहुचाई चाहे वो धर्मांतरण के जरिये हो या फिर मंदिर को तोड़ कर लेकिन हममे से कुछ लोग आज उनकी महिमामंडन करते नहीं थकते आखिर क्या कारन है . आज भी हिंदुस्तान के लगभग सहरो में विदेसी आक्रंताओ चाहे वो औरंगजेब हो , तुगलब हो ,अकबर हो के नाम की बोर्ड सड़क पर नजर आती है , यही नहीं अंग्रेजो ने जिन्होंने हमारे ऊपर असंख्य अत्यचार किये उनके नाम की मुर्तियो पर कुछ लोग माल्यार्पण करते है .और उनके नाम की भी सड़क आज मौजूद है ? क्या ये नाम अभी भी रहना चाहिए मुग़ल सराए जैसे स्टेशन का नाम बदल कर हमारे स्वतंत्रता सेनानियो के नाम पर नहीं किया जाना चाहिए ताकि हमारे पूर्वजो को सम्मान मिले लेकिन दुर्भाग्य है इस देश का की आजादी के बाद भी हम मानसिक तौर पर गुलाम है और आक्रंताओ के नाम का माला जपने में स्वयं को धन्य समझते है ?220px-Pakhtun_warrior

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

क्या हिंदुस्तान को पाकिस्तान पर हमला करना चाहिए ?

पाकिस्तान ने एक बार फिर कायराना हरकत करते हुए जम्मू के पूंछ में आर्मी जवानो पर हमला किया जिसमे हमारे ५ जवान शहीद हो गए।  पाकिस्तान द्वारा यह कोई पहली कायराना हरकत नहीं है। पाकिस्तान ने कभी भी एक अच्छे पडोशी का धर्म नहीं निभाया ? 1947 से 2013 तक हजारो बार छद्म रूप से हमले किये गए जिनमे हमारे हजारो सैनिको को जान गवानी पड़ी है।  विगत जनवरी महीने में  भी हमारे एक जवान का सर काट कर ले गए लेकिन हमारी सरकार ने हमेसा शांति वार्ता में विस्वाश रखा और धोखा खाते रहे लेकिन कब तक ?  मंगलवार के हमले के बाद एक बार फिर पुरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा चरम पर है लेकिन हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह का वही घिसा पिटा बयान आया है जो हमले के बाद अक्सर हम भारतीय को सुनने को मिलता रहा है  " हम ऐसे हमले बर्दास्त नहीं करेंगे " आखिर मनमोहन सिंह इन बयानों से क्या साबित करना चाहते है वही रक्षा मंत्री ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बयान  दिया की " पाकिस्तानी सेना की वर्दी में कुछ आतंकियो ने हमला किया " जिससे पाकिस्तान को ही यु एन ओ में बचने का मौका प्रदान किया गया है वही विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी बयान वीर निकले यह कह कर की " हमें कमजोर समझने की भूल कोई ना करे "?  जब सरकार से पूरा देश एक कड़ा कदम उठाने की मांग कर रहा है तब  सरकार सिर्फ बयान बाजी से देश वाशियो को भरोषा दे रही है ? आखिर कब तक हमारे जवानो की मौत पर सरकार इस प्रकार की बयान बाजी करती रहेगी।  और हम अपने  रण बाकुरो की मौत का मातम मानते रहेंगे यह एक विचारनीय प्रश्न है क्या सरकार की नजर में जवानो की मौत की कोई कीमत नहीं है ? क्या इनके परिवार नहीं है क्या मौत के बाद मुआवजे की घोषणा से शहीदों के परिवार वालो के जख्म भर जायेंगे ऐसे कई सवाल खड़े है हमारे समक्ष लेकिन क्यारेणुका चौधरी कहती है हम गाँधी वादी विचार धारा के लोग है ?  गाँधी ऐसी अहिंषा के पक्षधर थे ? मेरे विचार से नहीं  महात्मा गाँधी ने कभी ऐसी अहिंषा का पक्ष नहीं लिया था की कोई हमारे ऊपर हमला करता रहे और हम बयान वीर बन कर बर्दास्त करते रहे ? कोई हमारे वीर सेना का गला काट कर ले जाये और हम नपुंसक बन बैठे रहे ? ऐसे हमलो से जहा देश की सेना का मनोबल टूट रहा है वही दूसरी और पाकिस्तान का मनोबल बढ़ रहा है और वो ऐसे हमले तेज कर रहे है ?हमारे पास वीर सेनानियो की फ़ौज है ?  जिनमे पाकिस्तान को नेस्तोनबुत करने की ताकत है ? हमारे पास अत्याधुनिक  हथियार है ये क्या देखने के लिए रखे गए है आखिर ऐसे हथियारों का तब क्या काम ? समय आ गया है की पाकिस्तान के खिलाफ कठोर करवाई की जाये ताकि ऐसे हमले करने की हिम्मत ना जुटा पाए ये पाकिस्तानी ना की बयान वीर बन कर देश की जनता और सैनिको का मनोबल तोड़ने वाले बयान दिए जाये 

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

लव जिहाद ?

इस्लाम की विस्तार वादी निति का घिनौना रूप है लव जिहाद शायद इस बात को देश के सेक्युलर नेता और छद्म धर्म निरपेक्ष लोग ना माने लेकिन बड़े पैमाने पर हिन्दू युवतियो को प्यार के जाल में फसा कर मुश्लिम युवको द्वारा धर्मान्तरित करवाया जा रहा है। यह समस्या एक चुनौती बन कर उभरी है हमारे सामने जिसका ठोस उपाय अत्यंत ही आवश्यक है। आतंकी हमलो में ५०-१०० मारे जाते है और हम कुछ दिन बाद इसे एक घटना समझ कर भूल जाते है लेकिन यह एक ऐसा हमला है जिसका घाव जिंदगी भर दर्द देने वाला है क्योकि यदि हिन्दू परिवार की लड़की किसी गैर धर्म में जाती है तो सायद इससे बड़ा हमला एक पुरे हिन्दू परिवार पर दूसरा कुछ नहीं होगा। लव जिहाद हिन्दू लडकियो को अपने प्रेम जाल में फसा कर मुश्लिम युवक उनका शारीरिक शोषण तो करते ही है साथ ही उनका धर्म परिवर्तन भी करवा रहे है। सूत्रों की माने तो पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आई एस आई इनकी फंडिंग करती है यही नहीं हिंदुस्तान की कई नामी मुश्लिम संगठनो के नाम भी सामने आये है जो मुश्लिम युवको को बड़े पैमाने पर धन मुहैया करवा रही है। साथ ही इन्हे ट्रेनिंग भी दिया जाता है की कैसे ये लडकियो को फसयेंगे ? लड़के पहले अपना हिन्दू नाम बताते है ? हाथो में रक्षा सूत्र बढ़ाते है हिन्दुओ की तरह ? महंगे मोबाइल फ़ोन और फैसी कपडे पहने है जबकि इन लडको के घरप की माली हालत बिलकुल ही ख़राब होती है आखिर कहा से आते है इनके पास ये सब ? गौरतलब हो की सीमा वर्ती क्षेत्रो में अशंख्य युवतियो को प्रेम जाल में फसा कर ऐसे कुकृत को अंजाम दे रहे है ये युवा हमारी भोली भाली लडकियो को ये सब्ज बाग़ दिखाते है और जाल में फसने के बाद इन लडकियो से देह व्यापर जैसा घिनौना कार्य तक करवाते है। जो लड़की एक बार इनके जाल में फस गई उनका निकलना मुश्किल हो जाता है। गौरतलब हो की 2006 से 2009 तक मात्र केरल में 4000 से अधिक लडकियो को धर्मान्तरित करवाया गया है जिसे लेकर केरल हाई कोर्ट ने चिंता जताई और पुलिस ने भी यह सब माना ? जबकि पुरे देश में यह संख्या लाखो में पहुच गई है। वही अगर बिहार की बात करे तो यहाँ भी इसने अपना पाव पसारना आरम्भ कर दिया है ? सीमा वर्ती किशनगंज जिले में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ रहे है जहा प्रेम जाल में फसा कर इस कुकृत को अंजाम दिया जा रहा है जब तक इन लडकियो को समझ में आता है तब तक मामला बहुत आगे निकल चूका होता है जहा से इनका वापस आना मुश्किल हो जाता है लेकिन राष्ट्रीय समाचारों की सुर्खियो में यह कभी नहीं आ पाता ? क्योकि सेकुलर मीडिया यह सब दिखाना उचित नहीं समझता वही नेता ऐसे मामलो को निजी मामला बता कर पल्ला झाड़ लेते है ?love jihad
यहाँ जिहाद का मतलब समझा देना उचित होगा जिहाद का मतलब है धर्म की रक्षा के लिए लड़ा जाने वाला युद्ध जो की गैर मुश्लिमो के खिलाफ लड़ा जाता है उन्हें मुश्लिम धर्म मनवाने के लिए स्वेक्षा से मान गए तो ठीक अन्यथा साम दाम दंड भेद की निति अपना कर पुरे ब्रह्मांड को इस्लाम में बदल देना है
और इसी विस्तार वाद की निति को लेकर आज की नई पीढ़ी चल पड़ी है क्योकि हिंदुस्तान में जबरन ये काम नहीं किया जा सकता
जहा जबरन किया जा सकता है कर रहे है जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश में दिन प्रति दिन हिन्दू लडकियो को उठा कर ले जाने के मामले सामने आते रहते है लेकिन हिंदुस्तान में इसे अलग रूप दे कर लव जिहाद किया जा रहा है और हमारी भोली भली लडकियो को अपने प्रेम जाल में फसा कर धर्मान्तरित करवया जा रहा है। समय आ गया है की धर्म परिवर्तन और गैर धर्म में विवाह के लिए सरकार कठोर कानून बनाये ताकि हमारी भोली भली बछियो का धार्मिक आधार पर शोषण को रोक जा सके इसके लिए हमें सरकार से मांग करनी चाहिए साथ ही हमें भी अपने बच्चो पर विशेष ध्यान देना चाहिए उनका मेल जोल किसके साथ बढ़ रहा है इसपर विशेष निगरानी राखी जनि चाहिए और हो सके तो मोबाइल देने से बचना चाहिए यही नहीं धार्मिक शिक्षा देने पर विशेष बल दिए जाने की आवश्यकता जान पड़ती है 1343054807_love jihad1005878_386290584810438_1789175444_n

सोमवार, 29 जुलाई 2013

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान।

मर्यादा पुरुषोतम श्री राम का चरित्र हम सभी सनातन   धर्मावलंबियो के लिए अनुकरणीय है।  भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के मर्यादा पुरषोतम बनने  की कहानी भी कुछ कम प्रेरणा दायक नहीं है।  हमारी आज की युवा पीढ़ी अपने धर्म से विमुख होकर पाश्चात्य सभ्यता के पीछे ऐसे भाग रही है जैसे घुड़ दौड़ हो रहा हो और उसमे कही ये पीछे ना छुट जाये लेकिन आज  जितनी भी सभ्यता या संस्कृति हिंदुस्तान में पनपी है उनका मूल सनातन संस्कृति है सायद इस बात से हमारी नई  पीढ़ी अनभिज्ञ है यहाँ जरुरत है हम सभी संस्कृतियो और सभ्यता से अच्छा कुछ सीखे लेकिन अच्छी बातो को ना की बुराई  को।  आज की युवा पीढ़ी मर्यादा पुरषोतम राम के चरित्र उनके अन्दर के त्याग सयम समर्पण से लगभग अनभिज्ञ है जिसकी वजह से अन्य धर्मो को मानने वाले अपने अपने ढग से श्री राम के  चरित्र का वर्णन करते है यहाँ तक की कुछ लोग स्वार्थ की वजह से बेहद शर्म नाक टिपण्णी भी करते है और हम मूकदर्शक हो सुनते रहते है क्योकि हमें हमारे परिवार में इस प्रकार की शिक्षा ही नहीं दी गई हमारे परिवार वालो ने हमें अंग्रेजी पढ़ना उचित समझा ताकि हमें बेहतर रोजगार प्राप्त हो सके जिसका नतीजा हुआ की हम स्वयं  के धर्म से विमुख होते गए हमारे बच्चे ओ गॉड , मोम , डैड बोल कर खुश हुए और हम यह सुन  कर, लेकिन इसी अंग्रेजियत ने जब बूढ़े हुए तब रंग दिखाया बच्चे ने जब माता पिता को वृद्ध आश्रम में भेज दिया लेकिन यदि हम अपने बच्चो को जन्म काल से ही अंग्रेजियत के साथ साथ अपने सत्य सनातन धर्म से परिचित करवाते तो सायद ऐसा नहीं होता।   आज लगभग हिन्दू परिवारों में यह देखने को मिल जायेगा जो की चिंता का विषय है।  हमारी संस्कृति और सभ्यता पर जितना प्रहार विदेशी आक्रंताओ ने नहीं किया उससे कही अधिक हमने स्वयं किया है।  आज श्री राम के चरित्र से हमें कुछ सिखने के आवश्यकता ताकि हम अपने धर्म की रक्षा कर सके।  श्री राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा का पालन करते हुए  ताड़का राक्षसी का वध किया , पुत्र  धर्म का पालन करते हुए  वन प्रस्थान किया   जबकि  वो चाहते तो पिता की आज्ञा का उलंघन कर सकते थे ।  प्रजा की बात मान कर पत्नी सीता तक का त्याग कर दिया ताकि एक कुशल प्रसाशक कहलाये । ऐसे है श्री राम चन्द्र जी जिनका गुण गान करके राक्षस कुल में जन्मे विभीषण का उद्धार हो जाता है हम तो मानव योनि में जन्मे है यदि रघुनायक का गुण गान करे तो हमारा क्या कल्याण नहीं होगा आज  की युवा पीढ़ी को समझना चाहिए।  
सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान। 
सादर सुनहि ते तरहि भव सिंधु  बिना जलजान।। 

मोह मूल सुल प्रद त्यागहु तम अभिमान। 
भजहु राम रघुनायक कृपा सिन्धु भगवान।। …… शिया वर राम चन्द्र की जय। 
                                                                           पवन पुत्र हनुमान की जय।        

रविवार, 30 जून 2013

श्री राम जन्म भूमि संघर्ष गाथा ?


राज सत्ता के लिए भले ही राम जन्म भूमि और मंदिर कोई स्थान ना रखता हो लेकिन भगवन राम हमारे आराध्य है और रहेंगे भगवन राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बने यह देश के करोडो हिन्दुओ की मांग हमेसा से रही है और आगे भी रहेगी क्योकि यह हमारी आस्था का प्रतिक है यही नहीं
हमारे पूर्वजो ने भी कभी राम मंदिर पर अपना दावा कमजोर नहीं होने दिया .१५२८ में बाबर की अनुमति से मीर बाकी ने मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनवाई लेकिन अयोध्या में रहने वाले हिंदू कभी हार नहीं माने तब से ही उन्होंने अपना विरोध जारी रखा इतिहास कारो के अनुसार 1534 इसवी में अयोध्या में पहला दंगा हुआ और कई गुम्बजो को तोड़ दिया गया उसके बाद मुश्लामानो ने यहाँ नमाज अता करनी बंद कर दी .बाबर के बाद औरंगजेब का इस इलाके में मृत्यु पर्यंत कब्ज़ा बरक़रार रहा लेकिन विवाद कम नहीं हुआ था
१५३० से १५५६ इसवी तक हुमायु के साशन काल में दस बार युद्ध यहाँ  हुए एक महिला रानी जय राज कुमारी तथा स्वामी महेस्वरानंद ने बार बार विधर्मियो को छट्टी का दूध याद दिलाया लेकिन अंतत पहले स्वामी महेस्वरानंद और बाद में रानी साहिबा सहीद हो गई ?क्या इतिहास इनकी सहादत को कभी भुला सकता है /
१७३४ इसवी में मुह्हमद सहादत साह गद्दी पर बैठा तब बुरहान उन मुल्क सादत अली खान अवध का गवर्नर बना उसके साशन काल में पुन्ह हिन्दुओ ने राम जन्म भूमि पर अपना दावा किया .इतिहाश कारो के अनुसार यही सबसे पहला मुकदमा ज्ञात हुआ है .१७६३ से १८३६ तक ५ बार अमेठी के राजा गुरु दत्त सिंह और पिपरा के राजा राज कुमार सिंह के नेतृत्व में मुग़ल सल्तनत को चुनौती दी गई तब जा कर मुगलिया सल्तनत ने हिन्दुओ से हार मानते हुए यहाँ पूजा और नमाज दोनों की मंजूरी प्रदान की तत्पश्चात हमारे रन बाकुरो ने यहाँ पूजा आरम्भ तो करवा दिया लेकिन उनकी मांग यही रही की मस्जिद को पूरी तरह हटाया जाय और ऐसा उन्होंने किया भी इस दौरान चार बार युद्ध हुए जो की बाबा उद्धव दास और भाटी नरेश के नेतृत्व में लड़े गए हार मान कर नबाब वाजिद अली साह ने तीन सद्शिया कमिटी का गठन किया गया जिसमे एक मुश्लिम और एक हिन्दू और तीसरा ईस्ट इंडिया कंपनी का मुलाजिम थे जिसमे यह बात सामने आई की मीर बाकी ने मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनवाई लेकिन दुर्भाग्य से १८५६ में अंग्रेजो का अवध पर कब्ज़ा हो गया और अंग्रेजो ने पुनः दोनों समुदाय को यहाँ पूजा और नमाज की अनुमति दे दी लेकिन गौर करने वाली बात है की हजारो प्रायशो के बाद भी हमारे पूर्वजो ने यहाँ पूजा अर्चना कभी बंद नहीं की १८५७ इसवी जहा स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए भी महत्वपूर्ण तारीख थी और स्वतंत्रता हेतु आवाज बुलंद हो चुकी थी वही राम जन्म भूमि भी ऐतिहासिक स्थान रखता है क्योकि इसी साल बहादुर साह जफ़र और आमिर अली द्वारा राम जन्म भूमि स्थल हमें देने का निर्णय लिया गया और हिन्दुओ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बहादुर साह जफ़र को भारत का सम्राट घोषित कर दिया …………………………….
तमाम जानकारी अलग अलग इतिहाश कारो द्वारा लिखी गई पुस्तको से .
.शेष अगले भाग में

शुक्रवार, 28 जून 2013

आओ खेले एनकाउंटर की राजनीती ?

ऐसा लगता है की पुलिस और सुरक्षा बल के जवानो को अब अपराधियों से भिड़ने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना पड़ेगा की आतंकी या अपराधी हिन्दू है या मुश्लिम हिन्दू हुए तो ठीक उन्हें ठोक दिया जायेगा लेकिन कही भूल से वो मुश्लिम हो गए तो उन्हें राज्यों की पुलिस एन आई ए या सीबी आई के हवाले कर देगी एन आई ए उन्हें सोनिया और शिंदे तक ले जायेगा.गुनाह काबुल कर लिया तो ठीक नहीं तो उन्हें अखिलेश या नितीश या लालू के पास भेज दिया जायेगा मुआवजे के लिए आतंकियो को मुआवजे के साथ साथ नौकरी की भी पेश कश की जाएगी नौकरी लिया तो ठीक नहीं तो उन्हें मुआवजे के साथ जकिया जाफरी के पास भेज दिया जायेगा गवाह बना कर इस लिए सावधान ए देश के वीर जवानो तुम मरे तो कोई बात नहीं आतंकी नहीं मरना चाहिए तुम मरे तो १० लाख आतंकी मरा तो जिंदगी भर अदालत के चक्कर अब बोलो अदालत के चक्कर लगाना चाहते हो या आतंकियो के हाथो सहीद क्योकि केंद्र सरकार जिस प्रकार का राजनीती इशरत जहा मामले में कर रही है उससे तो ऐसा ही प्रतीत होता है सी बी आई और आई बी जैसी दो संवैधानिक संस्था आपस में भीड़ गई है और पूरा देश समझ रहा है की किसके इशारे पर सी बी आई ऐसा कदम उठा रही है गुजरात के मुख्या मंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो इन देश द्रोहियो ने पुरे मुडभेड से नरेन्द्र मोदी और अमित साह का नाम जोड़ दिया की उन्हें जानकारी थी क्या अब तक जितने भी आतंकियो की मौत हुई है कांग्रेस शाशित राज्यों के मुख्या मंत्रियो को इसकी जानकारी होती थी ?
और कहा जा रहा है की सी बी आई चार्जशीट में दोनों का नाम डाल सकती है .जबकि आजतक समाचार चैनेल ने विगत सप्ताह आतंकियो द्वारा की गई बात चित का टेप सार्वजनिक कर दिया था की इशरत और उनके साथियो की मंशा क्या थी .पिछले १५-२० वर्षो में आतंकी गतिविधिओ में सामिल सैकड़ो एनकाउंटर हुए और अधिकतर कांग्रेस साशित राज्यों में लेकिन इतना बबाल कभी नहीं मचा ना तो मीडिया ने ना ही केंद्र सरकार ने कभी इन मामलो की सुधि ली लेकिन छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ने का प्रयाश जिस प्रकार से किया जा रहा है क्या यह उचित है ऐसे में क्या पुलिस के जवान गुप्त सुचना के आधार पर कोई करवाई करने की हिम्मत दिखायेंगे ?

बुधवार, 19 जून 2013

कुर्सी केवल सत्य है बाकी सब असत्य है?

हमने धार्मिक ग्रंथो में पढ़ा और सुना की केवल राम नाम ही सत्य है लेकिन वर्त्तमान के नेताओ ने इन वाक्यों को झुट्लाते हुए पूरी कायनात की काया की पलट कर रख दी कल तक कांग्रेस की नीतिओ के धुर विरोधी बिहार के तथाकथित सेकुलर मुख्य मंत्री के जनाजे को अब कन्धा देने के लिए कांग्रेस के चार विधायक तैयार है .कल तक कांग्रेस की नीतिओ का विरोध करने वाले अब उन्ही के कंधो पर सवारी करने निकल पड़े है गौरतलब हो की नरेन्द्र मोदी को प्रचार अभियान का प्रमुख बनाये जाने के बाद नितीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ चुके है और १९ जून को विधान सभा में विस्वाश मत हासिल करेंगे वर्त्तमान में नितीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के पास ११८ विधायक है जबकि विस्वाश मत के लिए जादुई आकड़ा १२२ का है ४ विधायको की कमी कांग्रेस पूरा करने जा रही है बिहार विधान सभा में कांग्रेस के मात्र चार ही विधायक है .अगर हम बिहार की राजनीती की बात करे तो २०१० में बिहार की जनता ने एन डी ए को पूर्ण बहुमत प्रदान किया था और कांग्रेस और लालू रामविलाश की पार्टियो का जनता ने सूपड़ा समाप्त कर दिया था ये जनादेश बिहार की जनता ने कांग्रेस और अन्य दलों  की नीतिओ के खिलाफ दिया था लेकिन नितीश कुमार स्वार्थ की पराकाष्टा को पार करते हुए पुरे बिहार की जनादेश का ही अपमान कर डाला जिस नितीश कुमार ने २००३ में नरेन्द्र मोदी की तारीफों के पुल बंधते नहीं थकते थे वही नितीश कुमार अब नरेन्द्र मोदी के पक्के दुश्मन बन बैठे लेकिन नितीश को आडवानी से कोई दुश्मनी नहीं है आखिर ये कैसी धर्म निरपेक्षता है की एक पार्टी के एक नेता स्वीकार है और दुसरे नेता कतई स्वीकार नहीं है क्या इसका कोई जबाब नितीश कुमार बिहार की जनता को देंगे . यही नहीं १८ जून को भाजपा द्वारा आहूत बिहार बंद की सफलता को देख इन्होने अपने कार्यकर्ताओ को सड़क पर भाजपा कार्यकर्ताओ से मार पिट तक करने भेज दिया और ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीती के लिए कभी राम विलाश पासवान ने भी ऐसा ही किया था नतीजा आप लोगो ने भी देखा था जब उन्होंने बिहार में मुश्लिम मुख्य मंत्री बनाने के नाम पर खुद का है सिट नहीं बचा पाए थे अब नितीश कुमार भी उसी राह पर चल निकले है जहा प्रधान मंत्री उन्हें धर्मनिरपेक्षता का सर्टिफिकेट दे रहे है ऐसे समय में जब जनता भय भूख और अत्याचार से पीड़ित है और केंद्र की कांग्रेस नित सरकार को उखड फेकने का मन बना लिया हो वैसे समय में आप इस कदम को कितना जायज मानते है ?किर्पया जरुर बताये