सोमवार, 25 नवंबर 2013

नितीश सरकार के आठ साल का सच ?



बिहार कि नितीश सरकार ने आठ साल पुरे कर लिए है जिसका रिपोर्ट कार्ड आज बड़ी गर्म जोशी से इन्होने जारी  किया और सरकार कि उपलब्धिया गिनवाई है जिसमे सभी मोर्चे पर सरकार कि सफलता का गुणगान किया गया है लेकिन इसकी जमीनी सच्चाई क्या है ? अगर इन आठ वर्षो के शासन व्यवस्था का मुल्यांकन पहले  पाच वर्षो को छोड़ कर किया जाए  तो नतीजा शून्य निकलता है।  बिहार का आम नागरिक  होने के नाते सरकार के इन तीन वर्षो के कार्यकाल पर यही कहा जा सकता है की "हाथी के दाँत दिखाने के और खाने को अलग अलग होते है " वाली कहावत पूरी तरह यहाँ  चरितार्थ हुई है  ? शिक्षा , स्वास्थ्य , कानून व्यवस्था के साथ साथ पेयजल, परिवहन , बिजली का जितना ढिंढोरा पीटा जा रहा है जमीन पर कही नजर नहीं  आता।  जहा देखो बाबुओ का राज कायम है।  उच्य शिक्षा अपनी बदहाली पर आसुँ बहा रही है कॉलेज में शिक्षक नहीं है ,स्कुल में शिक्षक है तो उन्हें जनवरी फरबरी लिखना नहीं आता अस्पताल में बड़े बड़े बिल्डिंग बना  गए लेकिन बिना चिकित्सक के सफ़ेद हाथी बने हुए है।सदर अस्पताल रेफरल अस्पताल बने हुए है मरीज असमय काल के गाल में जाने पर विवश है  कानून व्यवस्था कि बात करे तो चोरी ,लूट , बलात्कार ,हत्या का ग्राफ बड़े पैमाने पर बढ़ा है ग्रामीण जलापूर्ति योजना अपनी बदहाली पर आसुँ बहा रही है। सहरी क्षेत्र में उचे ऊचे जलमीनार शोभा कि वस्तु बने हुए है। परिवहन कि बात करे तो प्राइवेट बस मालिको ने लूट मचा रखा है। मनमाना किराया इनके द्वारा उसुला जा रहा है बिजली कि बात करना आवश्यक है क्योकि गाव में आठ घंटे बिजली देने कि घोषणा बड़े जोर शोर से करते है मुख्यमंत्री जी लेकिन खुद इनके विधायक के गाव में तीन साल हो गए बिजली नहीं पहुची तमाम विभागो में भ्रस्टाचार का बोलबाला कायम है बस अब बिहार सूर्य अस्त होते ही मस्त हो जाता है क्योकि विकाश कही नजर आता है तो दारु के ठेके पर नजर आता है जो आज गली गली में खुल गए है ?

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

रोटी और बेटी ?

भारत और नेपाल का सम्बन्ध कभी रोटी और बेटी का हुआ करता था लेकिन अब समय बदल चूका है ? नेपाल में राजशाही कि समाप्ति के बाद जब से माओवादिओं ने सत्ता सम्भाली तब से ही नेपाल भारत विरोधी गतिविधिओ का मुख्य केंद्र बन गया क्योकि माओवादी चीन के करीबी थे और चीन हमारा परम्परागत दुश्मन  . नेपाल के रास्ते बड़े पैमाने पर मादक पदार्थो कि तश्करी के साथ साथ जाली नोट और आतंकी गतिविधिओ का सञ्चालन माओवादिओं के संरक्षण में होने के कई मामले सामने आये लेकिन भारत सरकार द्वारा कोई ठोश कदम नहीं उठाया गया ? यही नहीं नेपाल में माओवादिओं द्वारा भारत विरोधी नारे चीन को खुश करने के लिए लिखे गए  सूत्रो कि माने तो  नेपाल कि जमीन पर चीन भारत विरोधी गतिविधिओ को अंजाम देने के लिए राशि भी उपलब्ध करवाता है साथ ही भारत कि सीमा तक सडको के जाल चीन के रूपये से बिछा दिए गए है और अब एक बार फिर  जो हालात नेपाल चुनाव के बाद उभर कर सामने आ रहे है उनपर विचार करने कि अवसयकता है ? क्योकि नेपाल  चुनाव २०१३ में माओवादी नेता प्रचंड कि जबर्दस्त हार हुई है और प्रचंड ने चुनाव बहिस्कार कि धामी दे डाली है यदि प्रचंड सत्ता से  बेदखल होते है  तो इसके गम्भीर परिणाम नेपाल में देखने को मिलेंगे माओवादी एक बार पुनः नेपाल में सक्रिय हो सकते है या फिर नेपाल में सत्ता विरोधी आंदोलन यदि होते है तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा इसलिए भारत सरकार को नेपाल के हालातो पर नजर रखने कि आवश्यकता है ताकि वह लोकतंत्र बहाल रहे और नेपाल से जो रोटी और बेटी का सम्बन्ध शदियों से चला आ रहा है उसपर खतरा ना मंडराए ? 

बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

एक दोस्त कि कहानी ?

एक दोस्त कि कहानी ? 

अचानक ही सड़क से गुजरते वक्त नजर एक रिक्से वाले पर पड़ी देखा तो चौक गया क्योकि वो मेरे बचपन का मित्र श्याम था लेकिन श्याम रिक्सा चला रहा था ये बात कुछ समझ में नहीं आई आखिर इतना बुरा दिन कैसे आ गया श्याम का उससे पूछने और नजर मिलाने कि हिम्मत भी नहीं हो रही थी तब तक वो सवारी लिए आगे बढ़ चूका था और मुझे भी अपने काम में जाना था तो आगे बढ़ गया लेकिन पूरा दिन मस्तिष्क इसी उधेड़ बुन में लगा रहा कि आखिर श्याम कि ऐसी हालत क्यों हो गई साम में अन्य मित्रो से पता करने कि कोसिस कि तो पता चला कि जो श्याम १० वी कक्षा में ही में १०० रूपये कि नोट में तम्बाकू लपेट कर सिगरेट कि तरह पीता था अपनी साह खर्ची कि वजह से आज ऐसी स्थति पर पहुच गया कि दो जून कि रोटी के लिए रिक्शा चलाने पर मजबूर है . एक समय था जब श्याम को सभी मित्रो से अधिक पॉकेट मनी उसके पापा देते थे उसके पापा मछली के थोक व्यवसाई थे और सहर में उनकी अच्छी पहुच थी लेकिन उनकी मृत्यू के बाद श्याम अपनी साह खर्ची कि वजह से बने बनाये धंधे को बर्बाद करने के बाद अब पेट भरने के लिए रिक्सा चला रहा है . दोस्तों यह एक सच्ची घटना है और मुझे लगता है कि हमें इससे बहुत कुछ सिखने कि आवश्यकता है . अपने बहुमूल्य विचार जरुर दे कि में उस बचपन के मित्र के लिए क्या करू जिससे कि उसकी जिंदगी पुनः पटरी पर दौड़े 

रविवार, 20 अक्टूबर 2013

पाकिस्तान का अंत हम भारतीयों का सपना ?

वर्ष १९४७ भारत का बटवारा एक अलग देश पाकिस्तान का जन्म हम भारतीयों ने सोचा सायद इन्हें अब शांति मिल जाएगी लेकिन यह तत्कालीन  हुक्मरानो की बहुत बड़ी भूल साबित हुई और उनकी भूल का खामियाजा हम आज 67 वर्ष बीत जाने के बाद भी भुगत रहे है कहने को तो दुनिया के तमाम देशो ने पाकिस्तान को एक आतंकी मुल्क घोषित कर दिया लेकिन परोक्ष रूप से इन्ही मुल्को ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया में आतंक फ़ैलाने की छुट दे रखी  है क्योकि पाकिस्तान इन देशो से बड़े पैमने पर हथियार खरीदता है जिसका उधारण हमने अनेको मामले में देखा और परखा है ? जवाहर लाल नेहरु से लेकर वर्त्तमान प्रधान मंत्री  मनमोहन सिंह तक ने पाकिस्तान से समय समय पर समझौते किये लेकिन पाकिस्तान द्वारा तमाम समझौतों को दरकिनार किया गया और हम मूकदर्शक बन देखते रहे शिमला समझौता हो या आगरा समझौता लेकिन पाकिस्तान ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी . नियंत्रण रेखा पर बार बार अतिक्रमण और युद्ध विराम का उलंघन करके पाकिस्तान ने अपनी नियत को जाहिर किया और हम दोस्ती का एकतरफा प्रयाश करते रहे खोखली चतावनी देते रहे लेकिन उनके द्वारा हमले और तेज कर दिए गये जिसका नतीजा है की आज कश्मीर का बड़ा भू भाग उनके कब्जे में है जहा से आतंकी गत्विधियो का सञ्चालन बड़े पैमाने पर हो रहा है हमारे जवान सरकार की नपुंसकता की वजह से मारे जा रहे है जबकि हम बार बार सुरक्षा परिषद् और अमरीका के सामने गुहार लगाते रहे है  क्या यह हमारी सुरक्षा और विदेश निति पर सवालिया निसान नहीं खड़े करता ऐसे में जब आये दिन पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का उलंघन करके नियंत्रण रेखा पर फायरिंग की जा रही हो जवानो के साथ साथ निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हो तब क्या बात चित से समस्या का हल संभव है मेरे विचार से नहीं क्योकि "  लातो के भुत बातो से नहीं मानते "हो सकता है आप मेरे विचारो से सहमत ना हो लेकिन यही सच है आप में  से कुछ कहेंगे युद्ध समस्या का समाधान नहीं है ? युद्ध से महंगाई बढ़ेगी ? तो भैया आज भी महंगाई कहा कम है याद कीजये लाल बहादुर शास्त्री  जी , इंद्रा गाँधी और अटल बिहारी बाजपाई जी  को  जिन्होंने पाकिस्तान और चीन  को छटी का दूध याद दिलाया था और आम जनता से अपील की थी एक समय का भोजन बचाने की और हम युद्ध में विजयी हुए थे 90000 हजार पाकिस्तानी सैनिको को बंदी बनाया गया था . विश्व में सबसे अधिक युवाओ वाले देश है हम और हमारे युवा जब सेना में नौकरी के लिए घुश देते हो तो समझये युवाओ की भावना  को जब सरीर का एक अंग ख़राब हो जाता है तो उसे डॉक्टर काट कर हटा देते है की कही बीमार अंग अन्य अंगो को भी ख़राब ना कर दे यहाँ पाकिस्तान हमारा पडोसी है जो बार बार हमारे सैनिको पर हमले कर रहा है देश का युवा अब यही सपना देखता है भले एक समय भूखा रहना पड़े लेकिन ऐसे पडोशी का अंत होना चाहिए .  "अब नगाड़ा बज चूका है सीमा पर सैतान का नक्से पर से नाम मिटा दो पापी पाकिस्तान का " वन्दे मातरम 

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

बिहार की राजनीती के एक अध्याय का अंत ?



बिहार की राजनीती में धुर्ब तारा बन कर उभरे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की राजनीती का आज अंत हो गया उनका राजनितिक केरियर लगभग पूरी तरह  समाप्त हो गया क्योकि सर्वोच्य नयायालय के आदेश के अनुसार अब वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे गौरतलब हो की बहुचर्चित 956 करोड़ के चारा घोटाला मामले में सी बी आई कोर्ट ने  लालू यादव को 5 साल की सजा
के साथ साथ  25 लाख का जुर्माना सुनाया  वही जे डी यू सांसद जगदीश शर्मा और ;जगरनाथ मिश्र को भी 4 - 4 साल की सजा सुनाई  गई है  ? बिहार में  माय ( मुश्लिम + यादव ) समीकरण के जरिये सत्ता तक पहुचे लालू यादव ने  कभी " भूरा बाल साफ़ करो "जैसे नारे देकर समाज को तोड़ने का जो काम किया था इससे उसका भी अंत हो गया यही नहीं लाल कृष्ण आडवानी की रथ यात्रा को समस्तीपुर में रोक कर तो वो रातो रात मुश्लिम  रहनुमा  गए थे   समाज वाद का सबसे बड़ा पहरुआ भी लालू स्वयं को बताने में पीछे नहीं रहे बहुबल धन बल के साथ साथ तमाम विवादों से लालू का पुराना रिश्ता रहा रेल मंत्री बनाने के बाद लालू ने कई बदलाव कर जनता के दिल को जितने की कोसिस की लेकिन पुराने मित्र नितीश कुमार ने पटखनी देकर सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया उसके बाबजूद संघ विरोध की राजनीती करके बिहार में सत्ता के एक प्रमुख केंद्र बने रहे लालू यादव  प्रधान मंत्री बनने का सपना पाले बैठे रहे  लेकिन सायद लालू यादव भूल गए की कानून भी कोई चीज़ है इस फैसले से बिहार ही नहीं देश की जनता का भी विस्वाश न्यायिक प्रक्रिया पर बढ़ा है और  फैसले ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया भारत की न्यायिक प्रक्रिया में विलंब हो सकता है लेकिन कोई मुजरिम जुर्म करके बच नहीं सकता अब हम बिहारिओ को 22 nov का इंतजार है जब इसी मामले में वर्त्तमान मुख्या मंत्री नितीश कुमार और शिवानन्द तिवारी जिनपर मिल कर 1 . 5 करोड़ रूपये लेने का आरोप है

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

क्या सोनिया गाँधी को इंद्रा गाँधी के मौत की जानकारी थी ?

क्या सोनिया गाँधी को इंद्रा गाँधी के मौत की जानकारी थी ? आखिर क्यों उन्होंने राजीव गाँधी से विवाह के इतने वर्षो तक भारत की नागरिकता नहीं ली ?गौरतलब हो की राजीव और सोनिया गाँधी का विवाह 1968 में हुआ उसके बाद भी सोनिया ने इटली की नागरिकता नहीं छोड़ी।  सोनिया ने भारत की नागरिकता अप्रैल 1983  में प्राप्त की और ठीक उसके बाद श्री मति इंद्रा गाँधी की हत्या अक्टूबर 1984 में हो जाती है ? उसके बाद राजीव गाँधी प्रधान मंत्री की गद्दी पर बैठते है और Ottavio Quattrocchi से इनका सम्बन्ध देश के सामने आता है बोफोर्स घोटाले के रूप में इसके बाद राजीव की हत्या हो जाती है और ये तथा कथित अज्ञातवास में चली जाती है जबकि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और कहती है एक तो  नरसिम्हा राव ने  इन्हें महत्व देना कम कर दिया दुसरे इमानदार क्षवि वाले सीता राम केसरी (तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ) ने भी इनकी मनमानी मांगो को पूरा करना बंद कर दिया था अपना बोरिया बिस्तर बंधता देख सोनिया गाँधी ने राजेश पायलट , अर्जुन सिंह , माधव राव सिंधिया ,ममता बनेर्जी , नारायण दत्त तिवारी , जी. के.  मोपनर ,पी.चिदंबरम , जयंती नटराजन को सीता राम केसरी के खिलाफ भड़काया और पार्टी में बगावत करवा दी जैसा इनकी सास इंद्रा ने नेहरु के मरने के बाद शास्त्री जी के साथ किया था उसके बाद इन नेताओ ने सोनिया के लिए पार्टी में जमीन तैयार की और 1997 में पार्टी की सदस्यता दिलवाने के बाद 1998 में सोनिया गाँधी कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नियुक्त कर दी गई जहा तक बार बार कांग्रेस के नेता उन्हें प्रचारित करते है की उन्होंने प्रधान मंत्री पद स्वयं ठुकरा दिया तो यह भी एक कोरा झूठ कांग्रेस नेताओ द्वारा आम नागरिको की बीच भ्रम फ़ैलाने के लिए किया जाता है जबकि इन्होने प्रधान मंत्री बनाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली थी और माननीय राष्ट्र पति श्री कलाम के पास सांसदों का समर्थन पत्र ले कर पहुच गई थी लेकिन भला हो कलाम साहब का   क्योकि भारतीय संविधान के अनुसार भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति ही प्रधान मंत्री बन सकता है यह प्रावधान है   कलाम ]साहब ने इन्हें वापस कर दिया तो कांग्रेस नेताओ ने इन्हें महान घोषित करने के लिए अफवाह उड़ा दिया की सोनिया गाँधी को पद का लालच नहीं है ये सिर्फ भारत के गरीब शोषित और पीड़ित जनता की सेवा करना चाहती है ? अब आप बुद्धिजीवी तय करे की सोनिया जी कितनी महान है और इतनी जल्दी में विश्व की 5 सबसे अमीर महिलाओ की सूचि में कैसे सामिल हो गई ========= 
                                                 साभार। । विभिन्य पत्र पत्रिका और विकिपीडिया से। 

बुधवार, 11 सितंबर 2013

ये आग कब बुझेगी ?

चौक चौराहे से लेकर गली की पान दुकान पर हर और हिंसा ही हिंसा नजर आती है कही लोग रूपये के लिए  लड़   है तो कही  जमीन के  लिए और तो और अब पत्नियों के लिए भी लोग  लड़ते  नजर आते है एक साहब आ गए मेरे पास कहने लगे राजेश भाई मेरी पत्नी को बहला कर कोई ले गया लौटने कहता हु तो देता नहीं ? यही नहीं युवा वर्ग अपनी नई गर्ल फ्रेंड के लिए भी अपने मित्र से लड़ता हुआ नजर आ जायेगा ? उस पर पूछो तो कहेंगे हम शांति से रहना चाहते है लेकिन हमें रहने नहीं दिया जा रहा है /  कोई पडोसी को दोषारोपण करता है तो कोई सरकार को तो कोई अपने गृह मंत्रालय को जहा देखिये नुरा कुश्ती है / क्या आप ने कभी सोचा की आखिर मनुष्य जो स्वयं को सर्वश्रेष्ट प्राणी समझता है उसके मानवीय मूल्यों में इतनी गिरावट क्यों आई नहीं ना ? जरा सोचिये क्या हमारे पूर्वज भी इसी प्रकार लड़ते रहते थे या हम ही इस दुष्कृत में सामिल है जबकि हम चाँद पर पहुचने की बात करते है।  स्वयं को ना तो में कोई बाबा समझता हूँ और ना ही बड़ा विद्वान् लेकिन हमारी लालसा ने हमें हिंसा पर उतारू कर दिया हमारी लालसा बढती गई और हम अपनी लालसा को पूरा करने के लिए झूठ , फरेब का सहारा लेने पर मजबूर हुए और एक झूठ हमें सौ झूठ बोलने पर मजबूर करता है यह कोई निरा बुद्धू भी बता देगा ? वर्त्तमान परिस्थितियो की वृहत पैमाने पर चर्चा की आवश्यकता जान पड़ती है क्योकि इस आग को हमें बुझाना हिंसा से प्रेम के मार्ग पर कैसे लौटा जाये ताकि अपना भारत पुन्ह : विश्व गुरु बने  इसकी चिंता नई पीढ़ी को ही करनी है और हमारे युवाओ में यह जज्बा है तभी तो दिल्ली में एक निर्भया की आबरू लुटती है पूरा देश उस परिवार के साथ खड़ा रहता है जिसका नतीजा होता है आरोपी को सरकार सजा देने पर विवश होती है यही नहीं मुजफ्फर नगर में हिंसा होती है सोशल मीडिया उठ खड़ा होता है पीडितो के पक्ष में सरकार की भी कुम्भ करणी निंद्रा टूटती है ? आज जिस प्रकार आगे बढ़ कर लोग सड़को पर उतर रहे है पीडितो के पक्ष में खड़े हो रहे है यह एक अच्छा सन्देश है क्योकि अब गाँधी की एक मात्र अहिंसा की निति से हिंसा को रोकने का किया गया प्रयाश बेमानी साबित होगा  . अब आवश्यकता है मर्यादा पुरुषोतम राम के पद चिन्हों पर चलने की "सठ संग विनय कुटिल संग निति "और 

काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच॥58॥
 
भावार्थ:-(काकभुशुण्डिजी कहते हैं-) हे गरुड़जी! सुनिए, चाहे कोई करोड़ों उपाय करके सींचे, पर केला तो काटने पर ही फलता है। नीच विनय से नहीं मानता, वह डाँटने पर ही झुकता है (रास्ते पर आता है)॥58॥ मेरे विचार से यदि हम इस निति पर चले तो भारत को पुन्ह विश्व गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता ?

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

रेपिस्टो का स्वर्ग भारत ?

बलात्कार हिन्दुस्तानियो के दिन चर्या में सामिल हो गया है प्रात:काल हाथो में आने वाले अख़बार में कभी तमाम देश दुनिया की समस्याओ से रु बरु होने का मौका मिलता था अब चाय की चुस्कियो के साथ साथ बलात्कार की खबरों से मुख्या पृष्ट भरा होता है समाचार चेनल के टिकर हो या हेड लाइन्स सभी २१वि सताब्दी में बलात्कार की खबरों से भरे पड़े है कही नाबालिग से बलात्कार कही मौलवी द्वारा अपनी शिष्या से बलात्कार तो कही संत द्वरा बलात्कार इन तमाम बलात्कार की खबरों को देख सुन और पढ़ कर पूरी दिन चर्या ही बदल सी गई है . अब  तो गली मुह्हाले से लेकर  चौक चौराहे की चाय दुकान हो या मॉल लोग बलात्कार पर ही चर्चा करते दिख जाते है .? कही ४ साल की बच्ची का बलात्कार १२ साल के लड़के द्वारा हो रहा है तो ७० साल की बुजुर्ग महिला भी अछूती नहीं रह रह गई है बलात्कारियो के लिए ऐसी स्थिथि पर अपना हिंदुस्तान पहुच गया है ? लेकिन जब बलात्कार के कारणों पर प्रबुद्ध जन चर्चा करते है और इससे बचने के उपाय बताते है तो बड़ा ही हास्यास्पद लगता है हो सकता है की आप मेरे बातो से सहमत ना हो पाए लेकिन वर्त्तमान में समाचार चेनलो पर जो बलात्कार को रोकने के लिए चर्चो का दौर चलता है और ४-५ लोग बैठ कर बड़ी बड़ी डींगे हाकते है की कठोर कानून बना दिया जाये बलात्कारी के लिए फासी की सजा मुक़र्रर की जाये से में खुद को अलग रख कर देखता हूँ ?आज भारत में जितने भी कानून बलात्कारियो के लिए है मेरे विचार से पूर्ण है ? सबसे पहले हमें आवश्यकता है की बलात्कारियो को बलात्कार के लिए उत्प्रेरक का काम करने वाले तत्वों की तलास करना और उन्हें जड़ से समाप्त करना तभी जा कर हम इस घिनौने काम पर रोक लगा सकते है ?  भूमंडली करण ने हिंदुस्तान को कुछ अच्छा दिया लेकिन उससे कही अधिक बुराई फैलाई है जिसे तथाकथित आधुनिक सोच वाले कतई मानने को तैयार नहीं है और जो आधुनिकता पर सवाल खड़े करते है उनका ये खिल्ली उड़ाने से बाज नहीं आते चाहे निर्भया मामले में संघ प्रमुख मोहन भगवत का बयान " की बलात्कार इंडिया में हो रहा है " या फिर अभी सपा नेता नरेश अगरवाल का यह बयान की "लडकियो को ढंग के कपडे पहने चाहिए " की जबरदस्त खिल्ली उड़ाई गई कोई यह मानने को तैयार नहीं है की हम जैसा देखते है वैसा ही सीखते है आज टी वी , सिनेमा ने जिस तरह अश्लीलता फैलाई है शिक्षा   पद्दति   में जितनी  गिरावट  आई  है की उसे मानने को ये तैयार नहीं है .छोटे  छोटे  बच्चे जब टी वी और इन्टरनेट पर शक्ति प्राश . और अन्य कमोतेजक विज्ञापन देखते है तो उनके मन में भी जिज्ञासा उत्पन होती है ? प्रकृति का नियम है की पुरुष का नारी के प्रति स्वाभाविक आकर्षण होगा . पुरुष नारी को देख कर उसके निकट आने की कोसिस हमेसा से करता रहा है और करता रहेगा इसी से सृष्टी चलती है पुरुष के अन्दर हमेसा नारी का सानिध्य प्राप्त करने की चाहत रही है और रहेगी ? आप मेरे विचारो से सहमत हो भी सकते और नहीं भी कहेंगे की पुराणी सोच वाला व्यक्ति है लेकिन यह सच्चाई है बाजार में बगल से गुजरने वाली महिला को १६ साल का जबान भी घूम कर देखता है और ६० साल का बुजुर्ग भी क्योकि नारी एक आकर्षण है और जो इस आकर्षण से बच निकलता है वो संत होता है जो में और आप नहीं है जब विस्वमित्र नहीं बचे तो हम क्या चीज़ है . अगर इस घिर्नित कार्य को रोकने की प्रबल इक्च्छा सब के मन में है तो अविलब आधुनिकता के साथ साथ नैतिकता पर धयन दे बच्चो को आधुनिक शिक्षा के साथ साथ संस्कार वान बनाये तभी बलात्कार की घटना रुक सकती है अन्यथा कितना भी सख्त से सख्त कानून बना ले कुछ होने वाला नहीं है आधुनिकता रूपी राक्षस सब समाप्त कर देगा ///////////////////////// बुरा लगे तो क्षमा करेंगे ?

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

14th अगस्त १९४७ ?

14th अगस्त १९४७ को सिर्फ दो मुल्को का बटवारा नहीं हुआ था यह बटवारा दो दिलो का भी था पाकिस्तान जहा खुद को एक मुश्लिम राष्ट्र घोषित कर चूका था वही हिंदुस्तान के नेताओ ने अपनी परम्परागत सहिष्णुता दिखाते हुए धर्मनिरपेक्षता की चादर ओढ़ कर हिन्दू और मुसलमानों को एक छत के निचे रखने की कोशिश की थी और नेहरु कबूतर उड़ा कर शांति का सन्देश देने में लगे थे ? x1km7bलेकिन इसका परिणाम आज भी देखने को मिल रहा है भले ही पाकिस्तान एक आजाद मुल्क है लेकिन आजादी के बाद भी पाकिस्तान के मन में हिंदुस्तान के प्रति द्वेष कम नहीं हुआ है आखिर ये द्वेष क्यों उत्पन हुआ ? जबकि जिन्नाह ने जो मांग भारत के समक्ष रखी थी उसे हमारे हुक्मरानों ने पूरी तरह मान लिया था ? बटवारा दो मुल्को का हो रहा था लेकिन लाशे दोनों और से बिछ रही थी जिन्ना ने नागरिको के मन में हिन्दुओ के प्रति ऐसी नफरत भरी थी की ट्रेन की बोगिओ में जिन्दा लोग कम और लाशे अधिक थी . imagesनफरत की ऐसी आंधी चलाई जिन्नाह ने की सब कुछ देखते देखते खाक हो गया .जिन्ना और नेहरु की लालच में लाखो नागरिक मारे गए और आज भी मारे जा रहे है जबकि जिन्ना ने कश्मीर हैदराबाद ,पंजाब को पाकिस्तान में मिलाने की पुरजोर कोशिश की थी लेकिन जिन्ना के झासे में ये रजवाड़े नहीं आये थे क्योकि इन्हें जिन्ना की नियत का पता चल गया था उसके वाबजूद १९४८ में पाकिस्तान ने हमला किया और उसे मुह की खानी पड़ी और ये सिलसिला अब तक चला आ रहा है चाहे १९६२ हो १९७१ हो या फिर कारगिल युद्ध लेकिन इन तमाम युधो में मुह की खाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधरा और आगे इसके सुधरने की उम्मीद भी नहीं है पाकिस्तान की लगाई आग में एक और जहा कश्मीर आज भी जल रहा है वही देश के अन्दर भी छद्म रूप से नफरत की आग फ़ैलाने की कोशिश पाकिस्तानी जेहादियो द्वारा की जा रही है और हिंदुस्तान के अन्दर भी आज एक तबका ऐसा मौजूद है जिसे पाकिस्तान से प्रेम है ? हमारे हुक्मरानों की वजह से यह संख्या दिन प्रति दिन बढती जा रही है जिसका नतीजा है देश में आये दिन होने वाले दंगे और बम विस्फोट क्योकि भले ही इन विस्फोटो के पीछे आई एस आई और अन्य आतंकी संगठनो के नाम सामने आते हो लेकिन आई एस आई या अन्य संगठन बिना भारतीय मदत के घटनाओ को अंजाम नहीं दे सकते ये कोई निरा बुद्धू भी बता देगा ? आये दिन देश को दहलाने की कोशिश आज भी जारी है तो क्या एक पाकिस्तान हिंदुस्तान में अब भी बसता है यदि हां तो हमारे हुक्मरान कहा सोये हुए है ?

रविवार, 11 अगस्त 2013

जम्मू में हिंसा - सरकार मौन

जम्मू कश्मीर के 8 जिले में कर्फू लगा हुआ है गौरतलब हो की किस्तवाड़ में ईद के दिन हुई हिंसा में सैकड़ो हिन्दुओ के घर और दुकानों को जला दिया गया था जिसके बाद प्रसाशन ने कर्फु लगा दिया लेकिन उसके बाद भी जम्मू की हालत बिगड़ी हुई है ? अभी तक हिंसा रोक पाने में जम्मू और केंद्र सर्कार विफल है जिसका नतीजा है की अभी तक दर्जनों मौते हो चुकी है ? केंद्र सरकार   हिन्दुओ के जान माल की रक्षा में पूरी तरह विफल है वही हालत का जायजा लेने जा रहे अरुण जेटली को भी जम्मू  सरकार ने जाने नहीं दिया ? ऐसा लगता है पर्दे के पीछे अल्प संख्यक हिन्दुओ के खिलाफ सरकार बड़ी साजिश कर रही है ? क्योकि  पाकिस्तान द्वारा भी फायरिंग की जा रही है साथ ही जमात उल दावा आतंकी हाफिज सईद ने स्वतंत्रता दिवस पर बम विस्फोट की धमकी दी है वही  गुजरात के समुद्री क्षेत्र से 13 आतंकियो के प्रवेश की सुचना पर हाई अलर्ट जारी  किया गया है  सरकार अविलम्ब वहा के हिन्दुओ के जान माल की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाये और दोषीओ के खिलाफ सख्त करवाई की जाये जिससे जम्मू कश्मीर के अल्प संख्यक हिन्दुओ के मानवाधिकारों की रक्षा हो सके ?