सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

लोक आस्था का महान पर्व छठ !!!

बिहार झारखण्ड के साथ साथ पुरे देश में मनाये जाने वाले छठ पर्व की अपनी अलग ही महिमा है विद्वानों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की सष्टि तिथि को मनाये जाने के कारन इस पर्व का नाम छठ पड़ा .साथ ही महाभारत काल में भी पांडवो द्वारा छठ व्रत करने की बात सामने आती है यह ऐसा त्यौहार है जिसमे उगते हुए सूर्य के साथ साथ डूबते हुए सूर्य की भी पूजा की जाती है वो भी ससरीर जल में खड़े हो कर सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है क्योकि हमारे जीवन में जल और सूर्य दोनों का ही अत्यधिक महत्व है बिना जल और सूर्य के जीवन की सम्भावना नहीं की जा सकती साथ ही इस त्यौहार में अर्ध देने का अपना वैज्ञानिक महत्व भी है जिसके अनुसार सूर्य की किरने जल से प्रवर्तित होने के कारन सात रंगों में बिखर जाती है जिससे अर्ध्य देने वाले पर सकारात्मक उर्जा का संचार होता है .छठ पर्व में कोई जाति का बंधन नहीं होता है जिस सूप में छठ का प्रसाद रखा जाता है उसका निर्माण डोम करते है और माला का निर्माण माली इस लिए इस पर्व को हम लोक आस्था का पर्व कहते है चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा की सुरुआत नहाये खाए से होती जिसमे व्रती गंगा अस्नान के बाद सुध और सात्विक भोजन करती है और लौकी का विशेष महत्व रहता है दुसरे दिन दिन भर के उपवास के बाद सायं काल चावल का खीर और रोटी बनाई जाती है प्रसाद चढाने के बाद उसे वितरित किया जाता है और उस दिन खरना के प्रसाद को व्रती भी ग्रहण करती है खरना के बाद व्रती का निर्जला व्रत आरम्भ हो जाता है जो की लगातार ३६ घंटे तक का होता है तीसरे दिन व्रती निकट के तालाब या नदी में जाती है और सूप जिसमे फल प्रसाद और विशेष कर आटे ,गुड .और घी से बनाये जाने वाला ठेकुआ और अन्य सामग्री होती है को लेकर घंटो जिसमे लगभग आधा सरीर पानी में डूबा रहता है खड़ी रहती है और सूर्य भगवन के जब अस्त होने का समय होता है तो अर्ध्य देती है और पुरे परिवार और समाज के लिए भगवन सूर्य से मंगल कामना करती है चौथे दिन जो की अंतिम दिन है इस महा पर्व का प्रात काल उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही यह पर्व समाप्त होता है .यही नहीं इस व्रत में साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि कोई गलती ना हो . .जय छठ मैया की 

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

सांप्रदायिक हिंसा बिल या देश तोड़ने की साजिश ?

इन दिनों देश में एक बिल की बड़ी चर्चा है जिसे  कांग्रेस सरकार ने साम्प्रदायिक हिंसा बिल का नाम दिया है इस विधेयक की जो मूल अवधारणा रखी गई है अगर लागु हो जाती है तो देश को टुकड़े में विभाजित होने से कोई रोक नहीं सकता एक तो यह देश की संघीय ढाचे  पर प्रहार है दूसरा राज्यों में सीधे  तौर  पर केंद्र  का हस्तछेप हो जायेगा .आखिर क्या है इस विधेयक में यह भी जानना अत्यंत आवश्यक है कांग्रेस की मुश्लिम तुष्टिकरण की निति इस विधेयक के जन्म का कारन बनी है और इसका साफ तौर पर लक्ष्य है लक्षित हिंसा को रोकना और   हिन्दुओ द्वारा मुश्लिम वर्ग पर की जाने वाली हिंसा से बचाना अर्थात यदि कोई हिन्दू मुश्लिम वर्ग  पर कोई जुल्म करता है तो बिना जाच के ही उसपर मुकदमा कर दिया जायेगा चाहे उसकी बातो में कोई सच्चाई हो या नहीं यही नहीं विधयेक के मसौदे  के अनुसार यदि किसी समूह की सद्श्य  के कारन जन बुझ कर किसी नागरिक के खिलाफ ऐसा कृत किया जाये जो  राष्ट्र के सेकुलर तानेबाने को नष्ट करने वाला हो तो केंद्र सीधे तौर पर राज्यों में हस्तछेप  कर सकता है तो अगर यह बिल २००२ में पास हो गया होता तो क्या  गोधरा में मरने वाले 59  कार सेवको को न्याय मिल पता यही नहीं आज देश के ३५ राज्यों में से एक दर्जन राज्य मुश्लिम बहुल या फिर इसाई बहुल हो गए है और इन राज्यों में बड़े पैमाने पर हिन्दू निशाने पर है और तो और अन्य राज्यों में भी बड़े पैमाने पर आज तक जो हिंसा हुई है उसके मुख्य कारन मुश्लिम   समुदाय ही रहे है उनके द्वारा ही पहले दंगे किये गए है.प्रस्तावित कानून के मसौदे के अनुसार पीड़ित की व्याख्या मुश्लिम समुदय के रूप में की गई है और किसी भी प्रकार की छति चाहे आर्थिक ,सामाजिक या फिर कुछ और सभी का जिम्मेवार हिन्दू को माना गया है और इस कानून को तैयार  करने वाले  है सोनिया गाँधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् तथा हिन्दू विरोधी मंशिकता वाले  वो लोग है जो अपने आप को सेकुलर कहलाने में गर्व मह्सुश करते है  .यह कहना गलत नहीं होगा की जो कानून बनाया जा रहा है वो पूरी तरह से हिन्दू विरोध पर टिका है और इस कानून के जरिये हिन्दुओ को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है अगर इस विधयेक के सूत्रधार अपने कार्यो में सफल हो जाते है तो भारत की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी इस बात की भी जाच होनी चाहिए की किन परिस्थतियो में इस बिल को बनाने की आवश्यकता आन पड़ी जबकि आज मुसलमान पाकिस्तान और बंगलादेश से अधिक सुरक्षित हिंदुस्तान में है. तो क्या कांग्रेस को वोट बैंक की राजनीती इतनी निम्न स्तर पर पहुच चुकी है की बहुसंख्यको के हितो पर प्रहार कर वो सत्ता की मलाई चखना चाहती है इस बिल का पुरे भारत में बड़े पैमाने पर विरोध किया जाना चाहिए जिससे की हिन्दू हितो पर कुठराघात को रोक जा सके नहीं तो जिस तरह से औरंगजेब के साशन काल में हिन्दू पर अत्याचार हुए पुनह कांग्रेस के साशन काल में दोहराए जायेंगे ............जागो भारत जागो