रविवार, 12 मई 2013

खुस नसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है.


खुसनसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो उनकी यादो में ही जी रहा है
जिन हाथो के स्पर्श मात्र से ही रोम रोम पुलकित हो उठते थे
उन हाथो को ढूंढता फिर रहा हु कि तुम हो यही कही हो
जेठ कि तपती दुपहरी में आँचल में छुपा लेना तुम्हारा
कि कही से कोई किरण ना पड़ जाये मेरे चेहरे पर
कभी आँचल के कोरो से टपकते लार को पोछना
कभी ललाट पर पड़ आई सिकन को अपनी बाहों में समेट लेना
सब याद आता है आज लेकिन अब सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी यादे है
खुसनसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो बस तुम्हारी यादो में ही जी रहा हु
कभी सोचा ना था तुम यु हाथ छुड़ा कर चली जाओगी
अभी तो में अबोध था आखिर कौन सुलाएगा मुझे
हर अच्छे और बुरे से परिचित तुम्ही तो करवाती थी मुझे
कही से आता तो तुम्हे ढूंढता रहता तब तो एक आश थी कि
तुम हो यही कही हो
अब तो सिर्फ अनुभूतियो के सहारे
जिए जा रहा हु
खुस नसीब है मेरे वो दोस्त जिनके पास माँ है
में तो तुम्हारी याद में ही जिए जा रहा हु .
——————————- माँ तुम्हे सत सत नमन

रविवार, 21 अप्रैल 2013

करे कोई भरे कोई ?

दिल्ली में ५ वर्षीया गुडिया के साथ हुए दुराचार के बाद कई दिनों से पूरा देश उबाल पर है देश के कई स्थानों पर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है इस घटना की जितनी निंदा की जाये कम है ऐसे कुकृत करने वालो को सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए और में भी फासी की मांग करता हु इसमें कोई दो राय नहीं है पूरा देश आज गुडिया के साथ खड़ा है जैसे दामिनी के साथ खड़ा था लेकिन इन सब के बीच एक खबर यह भी है की पूर्व की भाति इस बार भी गुडिया के दरिन्दे बिहार के निकले एक आरोपी मनोज कुमार साह जहा बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का रहने वाला है वही दूसरा आरोपी प्रदीप दरभंगा जिले का जैसा की दामिनी के आरोपी राम सिंह भी बिहार का ही रहने वाला था लेकिन पुरे मामले को आज बिहार की छबी के साथ जोड़ कर देखा जाना उचित प्रतीत नहीं होता. जागरण जैसे प्रतिष्ठित अख़बार में घटना के बाद खबर छापी गई की जिसका टैग है “अब दिल्ली में जन्म लेना बन गया सजा ” और लिखा गया “आखिरकार एक और आरोपी वो भी बिहार का ही है। जियो बिहार के लल्ला।”
आखिर इस खबर के माध्यम से क्या सिद्ध करना चाहता है जागरण की जितने भी बिहारी है बलात्कारी है .भोपाल ,छत्तीसगढ़ ,राजेस्थान ,आसाम ,उत्तेर प्रदेश सहित पुरे देश में ऐसी घटनाये होती है ?तो क्या सब अपराधी बिहार के है एक मित्र लिखते है बिहारिओ को बहार निकलने पर पास देकर भेजा जाना चाहिए क्या ये हास्यास्पद नहीं है . बिहार कभी देश की सांस्कृतिक राजधानी हुआ करती थी गौतम बुद्ध,महावीर ,बाल्मीकि जैसे विद्वानों की धरती है चाणक्य की कर्म स्थली रही है बिहार क्या किसी एक के कु कृत के लिए पुरे बिहार को बदनाम करना जायज है .और तो और पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर पर जैसे बिहार को बदनाम करने की साजिश ही रच डाली गई है पुरे प्रकरण में मामला यही नहीं थमता गुडिया के गुनाह गार मनोज के परिवार वालो का पंचायत ने हुक्का पानी बंद कर दिया है और बड़े शान मीडिया के सामने इस बात को गाँव के मुखिया स्वीकार कर रहे है क्या लोकतान्त्रिक देश किसी गुनाहगार के परिवार वालो को सजा देने का अधिकार है हमारे एक मित्र कहते है अच्छा फैसला है आने वाले समय में इसका अच्छा परिणाम निकलेगा खुद को सभ्य समाज का मानने वाले लोग इस को जायज बताने में लगे है जबकि ये वही लोग है जब लडकियो के मोबाइल रखने पर पाबन्दी लगाई जाती है तो हंगामा खड़ा कर देते है और कहते है मानवाधिकार का हनन है तालिबानी फरमान है और ना जाने क्या क्या आखिर किसी एक के गुनाह के लिए उसके परिवार को सजा कैसे दी जा सकती है या पुरे बिहारी समाज को कैसे बदनाम किया जा सकता है ये तो वही कहावत हो गई की “करे कोई और भरे कोई ” आप जागरण जंक्शन के सुधि पाठक ही फैसला करे क्या मनोज और प्रदीप के गुनाह के लिए पुरे परिवार और बिहार को सजा दिया जाना न्याय सांगत है .

शनिवार, 13 अप्रैल 2013

ऐसा कोई सगा नहीं नितीश ने जिसे ठगा नहीं ?


जे डीयू के राष्ट्रीय सचिव शिव राज सिंह ने आज  नितीश कुमार पर प्रहार  करते हुई जिस प्रकार उन्हें अति महत्वाकांक्षी बताते हुए नरेन्द्र मोदी की तारीफ की और नितीश को  बुरा भला कहते हुए बताया की ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नितीश ने ठगा नहीं . क्या इसके कुछ नतीजे भी निकलेंगे या फिर जैसे चल रहा है वैसे ही चलता  रहेगा .क्योकि राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में मोदी पर आज भी एक राय नहीं बन पाई है  आज बहुत दिनों बाद जे डी यू के  किसी नेता ने दम ख़म दिखाते  हुए नितीश पर निशाना साधा है जबकि अन्य नेता चाहे शरद यादव ही क्यों ना हो  नितीश के आगे नत मस्तक ही दीखते है आप को याद होगा राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह  को कैसे नितीश ने सत्ता प्राप्ति के बाद किनारे किया था जबकि ललन सिंह नितीश के सुख दुःख के साथी बताये जाते थे और राबड़ी देवी ने तो दोनों को साला बहनोई तक बता डाला था    वही उपेन्द्र कुशवाहा भी कुछ कम हस्ती नहीं रखते थे और पुराने दिनों के साथी थे  लेकिन नितीश की मह्त्वकंषा दिन प्रति दिन ऐसी बढती गई की विरोधियो को एक के बाद एक किनारे करते गए और तो और जार्ज फर्नांडिस जिन्होंने नितीश को राजनीती का ककहरा सिखाया उन्हें भी नहीं बख्सा और जीवन के अंतिम दिनों में नितीश जार्ज साहब को छोड़ दिया ये तो है नितीश बाबु ऐसे अनेको उद्धरण है इनके गिरगिट की तरह रंग बदलने के लेकिन बिहार में भाजपा की वैसाखी पर चलने वाले नितीश बाबु आज भाजपा को ही मुह चिढ़ा रहे है तो इसके पीछे जिम्मेवार भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही है जिसने इन्हें कुर्सी तक पहुचाया आज  जे डी यू ६ -८ महीने समय भाजपा को देने की बात कर रहा है प्रधान मंत्री पद पर एक राय बनाये जाने पर  यकीन मानिये बिहार के ब्रह्मण ,राजपूत कोइरी ,कुर्मी के जिस गठजोड़ पर ये कुर्सी पर बैठे है आज यदि भाजपा नाता तोड़ ले तो नितीश बाबु औंधे मुह गिरेंगे लेकिन उप मुख्या मंत्री सुशील मोदी जैसा पाठ केंद्रीय नेतृत्व को पढ़ाते है ऊपर वाले वही पढ़ रहे है जिसका खामियाजा भी भाजपा को ही उठाना पड़ेगा  
जबकि २०१४ के बाद २०१५ में बिहार विधान सभा के चुनाव भी होने है .ऐसे में जब जे डी यू का एक धडा बगावत पर उतारू है भाजपा को चाहिए की नितीश कुमार से समर्थन वापस ले और बिहार में लोक सभा और विधान सभा चुनाव एक साथ करवाए तब नितीश बाबु को पता चले की उनकी औकात क्या है ?

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

नरेन्द्र / नितीश ?

लोक सभा चुनाव के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे है वैसे वैसे राजनितिक तापमान भी बढ़ता जा रहा है एक और अप्रैल के महीने में ही जून की तपिस ने जीना दुसवार कर रखा है तो दूसरी और देश की राजनितिक तपिस ने . देश से  आज महंगाई , भ्रस्ताचार ,आतंकवाद ,जैसे मुद्दे पूरी तरह गौण हो  चुके है मुद्दा सिर्फ नरेन्द्र मोदी बचे है जिन्होंने गुजरात में हैट्रिक लगा कर विरोधियो को पटखनी देने के बाद अपनी महत्वाकांक्षा लगभग जाहिर कर दी   है .और बड़े जोर शोर से यह चर्चा हो रही है की क्या भाजपा उन्हें प्रधान मंत्री का उम्मीदवार घोषित करेगी जिसपर भाजपा नेतृत्व अभी तक पूरी तरह मौन धारण किये हुए है और यही बाद विरोधियो को हजम नहीं हो रही है .एन डी ए में सामिल सहयोगियो में भी अभी तक एक मत नहीं हो पाया है जहा एक और अकाली दल ,शिव सेना ,जनता पार्टी नरेन्द्र के साथ खड़े है वही दूसरी और भाजपा के पुराने साथी नितीश कुमार कन्नी काटते नज़र आ रहे है और कंग्रेस के साथ गलबहिया कर रहे है .जनता दल यूनाइटेड के नेता शिवानन्द तिवारी तो गुजरात के विकाश मॉडल को पूरी तरह नकारते हुए बिहार के विकाश माडल की चर्चा पर अड़े हुए है यहाँ गुजरात माडल और बिहार माडल पर चर्चा जरुरी हो जाती है की आखिर बिहार के विकाश का माडल क्या है लालू यादव के जंगल राज की समाप्ति के बाद जब (२००५ )से  नितीश कुमार ने बिहार की कुर्सी संभाली  बिहार ने तरक्की  की इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन बिहार आज भी जाति गत समीकरण से बाहर नहीं निकल पाया जिसका उधारण है  दलित ,महादलित ,पिछड़ा ,अगड़ा के साथ साथ अल्प संख्यक यहाँ बता दे की बिहार में 18 प्रतिशत अल्प संख्यक आबादी रहती है और लगभग 35  प्रतिशत पिछड़ी जाति जिनमे (कुम्हार ,लोहार ,चमार ,दुसाद ,आदिवाशी ,) सामिल है जिन्हें नितीश कुमार ने इस प्रकार बाट दिया है की इन बेचारो को ना खुदा ही मिला ना मिसाले सनम ना इधर के रहे ना उधर के इनकी हालत आज भी जस की तस बनी हुई है वही बरह्मण ,राजपूत ,भूमिहार ,कुर्मी ,बनिया की हालत तो ख़राब है ही तो आखिर बिहार में विकास किसका हुआ आज बिहार में केंद्रीय योजना दम तोड़ रही है .ठेकेदारों को देने के लिए सरकार के पास रुपया नहीं है बिजली की हालत बद से बदतर है रोजगार के नए अवसरों का सृजन नहीं हो पा रहा है .विकाश योजनाये कागजो पर चल रही है मजदुर आज भी अन्य राज्यों में  पलायन को मजबूर है टैक्स में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी से व्यापारी वर्ग त्राहिमाम कर रहा है पंचायतो में महिलाओ को पचास प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया महिला सशक्तिकरण के नाम पर लेकिन इनके पास कोई काम नहीं है आखिर क्या करेंगी ये .पंचायत में काम करने वाली सरकारी एजेंसी ही आज तक निर्धारित नहीं कर पाई है यह सरकार .किसानो को समय पर पानी नहीं मिलता है यह है बिहार का विकाश माडल जिससे आप को परिचित करवाना  आवश्यक प्रतीत हुआ दूसरी और गुजरात के विकाश की बात करे तो नरेन्द्र मोदी समवेशी विकाश में लगे हुए है पुरे गुजरात का विकाश उनका मकसद है ना की किसी खास वर्ग या किसी खास जाति का .गुजरात में निवेश करने वालो का ताता लगा हुआ है जबकि बिहार में निवेश करने वाले कही नज़र नहीं आते क्योकि यहाँ संसाधन ही उपलब्ध नहीं है .गुजरात में हजारो करोड़ रूपये का निवेश हुआ लेकिन बिहार में सिर्फ हवा हवाई बाते हुए ऐसे में गुजरात माडल को तरजीह दिया जाये या बिहार माडल को फैसला हमारे ही हाथो में है की हम देश को कहा ले जाना चाहते है 

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

लाल आतंक ?

देश में आए दिन होने वाली आतंकी घटनाओ के बाद सरकार  से लेकर आम जन मानस तक हंगामा करते है और बड़े पैमाने पर शोर शराबा होता है  अख़बार से लेकर खबरिया चेनल तक कई कई दिनों तक सिर्फ और सिर्फ इस मुद्दे पर बहस करती है .घटना यदि पाकिस्तान प्रायोजित हो तो हंगामा और बढ़ जाता है आज कल तो खबरिया चैनेल पाकिस्तान से  भी गेस्ट बिठा लेते है ताकि टी आर पी मिलती रहे लेकिन बड़ा सवाल यहाँ यह है की हम पाकिस्तान प्रायोजित आतंक वाद पर जितना हंगामा करते है क्या उतना ही हंगामा   नक्सली संगठनो द्वारा किये गए राष्ट्र विरोधी घटनाओ के बाद करते है सायद नहीं .आज हर दुसरे दिन नक्सली संगठनो द्वारा बड़े पैमाने पर नरसंघार किया जा रहा है भारत माँ के  वीर सपूतो को घात लगा कर मार दिया जा रहा है इतिहास के पन्नो में जाये तो नक्सल आन्दोलन का जन्म पश्चिम बंगाल के नक्सल बाड़ी से आरम्भ हुआ लेकिन आज जहा से यह आन्दोलन पैदा हुआ था वहा पूरी तरह से शांति है आन्दोलन के जन्म दाता चारू मजुमदार ,कानू सन्याल अब इस दुनिया में  नहीं है अपने म्रत्यु के अंतिम दिनों में चारू मजुमदार ने आज के नक्सल आन्दोलन की प्रासंगिकता पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा था की आज के नक्सली अपनी राह भटक चुके है ये कोई आन्दोलन नहीं यह डकैती कर रहे है जब एक संस्थापक के यह विचार हो तो उनके दर्द को समझा जा सकता है।


लेकिन नक्सल बाड़ी से आरम्भ हुआ यह आन्दोलन धीरे धीरे देश के  कई राज्यों में अपने पाव पसार चूका है हमारी सत्ता प्रतिष्ठान की कमजोरी कहे या फिर इससे कुछ और इनके द्वारा अंजाम दी गई घटनाओ  में प्रति वर्ष हजारो सैनिको की जाने जा रही है .केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा बार बार बयान दिए जाते है उसका नतीजा आज भी  सिफर है .नक्सल बाड़ी से अब यह लाल आतंक बिहार ,बंगाल ,उड़ीसा ,छतीस गढ़ .सहित अन्य कई राज्यों तक पहुच गया है .आज नाक्सालियो के पास उच्य कोटि के हथियार मौजूद है आखिर ये हथियार उन्हें कहा से मिलते है खुफिया शुत्रो की माने तो आई एस आई का सहयोग इन्हें प्राप्त है इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे संगठन इनका लाभ उठा रहे है हिंदुस्तान में दहसत फ़ैलाने के लिए . ये नक्सली भी भारतीय है लेकिन जब ये भारत विरोधी कार्यो में संलिप्त हो तो इन्हें हम  अपना समझने की भूल नहीं कर सकते   हो सकता है की इनके साथ पूर्व में अन्याय हुआ है लेकिन तीन दसक बीत जाने के बाद भी यदि ये संतुष्ट नहीं हो पाए तो यह कहा जा सकता है की इनकी मनसा गलत है किसी भी राष्ट्र की अखंडता को खंडित करने की कोसिस करने वालो की आवज को हमेसा के लिए बंद कर देने का  अब समय आ गया है की देश की जनता जागरूक हो कर इनका मुखर विरोध करे साथ ही  सत्ता धारी पार्टिया भी वोट बैंक की राजनीती छोड़ कर ठोस उपाय निकाले जिससे की देश की एकता और अखंडता बनी रहे और हमारे वीर सिपाही अपने ही घरो में अपने ही भाइयो के हाथो काल कवलित होने से बचे .लाल आतंक का समूल नाश ही एक मात्र उपाय है क्योकि छुप कर वार करने वाले कभी शांति की भाषा नहीं समझेंगे  इनके साथ होने वाली शांतिवार्ता केवल और केवल समय की बर्बादी है और इस बात को हमारे नेता भूल जाते है और उनकी गलतियों के कारन हमारे वीर सिपाही असमय मौत के मुह में जाने को विवश है .

केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नक्सलियो द्वारा प्रतिवर्ष नक्सली हमलो में मारे गए जवानो और आम आदमी की संख्या देखे --

1996: 156 deaths     
  
1997: 428 deaths      

1998: 270 deaths     

1999: 363 deaths    
  
2000: 50 deaths 
     
2001: 100+ deaths      

2002: 140 deaths     

2003: 451 deaths    
  
2004: 500+ deaths    
  
2005: 700+ deaths 
   
2006: 750 deaths    
  
2007: 650 deaths   
   
2008: 794 deaths     

 2009: 1,134 deaths  

२ 0 1 0 : 1005
2011 : 606 2012 : 137  
          क्या अब भी नहीं लगता की इनपर कठोर करवाई की जरुरत है .


सोमवार, 18 मार्च 2013

21-16=5

16 साल में सेक्स १८ में लड़की की सादी जबकि लड़के की शादी की उम्र २१ साल २१- १६=५ इयर मजे के और कही इस दौरान बच्चे पैदा हो गए तो वो कहा जायेंगे क्या सरकार इसके लिए कोई राजीव गाँधी अनाथ आलय खोलेगी .बलात्कार के खिलाफ कोई कठोर कानून नहीं बना पाई सरकार तो नई बहस छेड़ दी गई / सहमती से सेक्स के बाद लड़के के ऊपर कोई क़ानूनी बाध्यता नहीं होगी क्योकि यह योन शोषण नहीं होगा अब लड़की या तो गर्भ पात करवाए (कानूनन वैध नहीं )या फिर बच्चे को जन्म देने के बाद किसी मंदिर मस्जिद इ सामने चुपके से छोड़ कर चली आये इसके सिवा लड़की के पास कोई चारा नहीं होगा और इसे कुछ लोग सरकार की सुधारवादी निति मान रहे है जो की कितना हाश्यास्पद प्रतीत होता है सरकार ने जनता से जुडी अन्य समस्याओ से लोगो का ध्यान सेक्स पर आकर्षित कर दिया सोचा देश के लोग बड़ा संस्कृति की दुहाई देते है चलो अब भारतीय संस्कृति पर ही हमला करते है जब से यह चर्चा उठी है चाहे सोशल मीडिया हो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या फिर प्रिंट मीडिया यहाँ तक की गली के पान दुकान में भी अब लोग देश से जुड़े अन्य मुद्दों को भूल कर सिर्फ इसी बात पर चर्चा में मशगुल है की देखो घुरना मत ,सिटी मत बजाना ,पीछा मत करना आखिर सरकार को क्या हो गया है पाकिस्तान द्वारा ५ सैनिको की हत्या नक्सालियो द्वारा सी आर पि अफ कैंप में हमला ,काला धन ,आतंकवाद ,भ्रस्टाचार ,महंगाई जैसे मुद्देअचानक से ही गौण हो गए है जो की सरकार चाहती थी इन विषयो पर चर्चा होते होते एक दो महीने का समय बीत जायेगा जनकल्याण की नीतिया ठंढे बसते में डाल दी जाएँगी और चुनावो का वक्त आ जायेगा और यही सरकार चाहती है की जनता को गुमराह कर अपना एजेंडा लागु कर दिया जाये देश की एकता ,अखंडता ,संस्कृति पर किसी को सोचने का मौका ही ना दिया जाये .

रविवार, 3 मार्च 2013

बांग्लादेशी हिन्दुओ को बचाओ ?

बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिन्दुओ के साथ अत्याचार किया जा रहा है गौरतलब हो की जमाते इश्लामी नेता को फासी दिए जाने के बाद यहाँ तनाव उत्पन हुआ है जमाते इस्लामी के नेता को १९७१ के युद्ध में पाकिस्तान का साथ देने के आरोप में बांग्लादेश सरकार द्वारा फाशी की सजा दी गई और उसके बाद से ही जमात के सद्श्यो द्वारा अल्पसंख्यक हिन्दुओ के ऊपर अत्याचार हो रहा है .हिंसा में अब तक सैकड़ो जाने जा चुकी है वही सूत्रों की माने तो इस हिंसा का पूरा लाभ आई एस आई उठा रही है और भारत विरोधी ताकतों को भारतीय सीमा में प्रवेश की योजना तैयार की जा रही है बांग्लादेश में हिन्दुओ के घर जलाये जा रहे है मंदिरों को तोडा जा रहा है महिलाओ के साथ दुराचार किये जा रहे है और भारत सरकार की और से अभी तक कोई बयान तक नहीं आया है भारत बांग्लादेश सीमा पर तनाव की स्तिथि बनी हुई है हिंसा का शिकार बने हिंदुओं के मुताबिक इन घटनाओं ने उन्हें 1971 के दौर की याद दिला दी है। जमात-ए-इस्लामी सदस्यों के उत्पात का निशाना बने राजगंज इलाके के शिक्षक शंकर चंद्र ने डेली स्टार को फोन करके बताया कि उनके समेत करीब 50 हिंदू परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर अन्य जगह शरण लेनी पड़ी है, क्योंकि जमात के लोग हिंदुओं के घर जलाने के साथ-साथ उनकी पिटाई भी कर रहे हैं। शंकर चंद्र ने कहा कि 1971 में वह सात साल के थे, लेकिन तब उतना भयभीत नहीं थे जितने आज हैं। -- हजारो इ संख्या में हिन्दू अपना घर बार छोड़ कर पालयन कर रहे है .भारत सरकार को जल्द से जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि अल्प संख्यक बांग्लादेशी हिन्दुओ के जान माल की रक्षा हो सके  

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

ममता में नहीं है मानवता ?

बंगाल की शेरनी ,गरीबो की मसीहा ,मार्क्स और लेलिन को मसीहा समझने वाले वामपंथियो को धुल चटाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्या मंत्री ममता बनेर्जी आज सत्ता के नशे में चूर है जब से बंगाल में ममता सत्ता पर काबिज हुई है तब से ही उन्होंने यह साबित कर दिया की सूती की साड़ी और हवाई चप्पल तो मात्र एक दिखावा था सत्ता तक पहुचने का कभी कार्टून बनाने वाले शिक्षक को जेल की सलाखों में डलवा दिया तो कभी खुद ही थाने में पहुच कर हंगामा करने वाले तृणमूल कार्यकर्ताओ को छुडवा लिया कानून को ठेंगा दिखाते हुए विरोधियो को कैसे कैसे हतकंडे अपना कर ममता ने कुछ ही दिनों में अपनी हिटलर शाही से पुरे बंगाल को बर्बाद कर के रख दिया  खैर ये तो विरोधियो के प्रति अपनाया हुआ रुख था लेकिन अपनी राज्य की जनता जिसने अपने बहुमूल्य मत देकर इन्हें सत्ता तक पहुचाया जब उन्हें ही इनकी घटिया तुष्टिकरण की निति की वजह से दुःख झेलना पड़े यहाँ तक की पूजा भी ना करने दिया जाये तो क्या कहेंगे ताजा मामला पश्चिम बंगाल के २४ परगना जिले के नालिखाली गाँव  का है जहा २०० हिन्दू परिवार  के घरो को  मुश्लिम दंगइयो ने पुलिस के सामने जला दिया गया .महिलाओ और लडकियो के साथ खुलेआम बतमीजी की  गई.हिन्दू देवी देवताओ के मंदिरों को तोड़ दिया गया लेकिन पुलिस मूकदर्शक बन देखती रही .हमलावर ट्रको में भर कर गाँव में हथियारों से लैश होकर पहुचे जिसकी जानकारी खुफिया तंत्र को पहले से थी लेकिन सरकार द्वारा इन हिन्दुओ को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया लोग मरते रहे दुकाने जलती रही लडकियो की इज्जत लुटती रही लेकिन पुलिस तमासबिन बन देखती रही ना तो पुलिस ने कोई मानवता दिखाई और ना ही ममता ने और तो और किसी भी राष्ट्रीय समाचार चैनेल ने खबर तक प्रसारित नहीं किया सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ को छोड़ कर    .गौरतलब हो की पश्चिम बंगाल के आधा दर्जन से अधिक जिले पूरी तरह मुश्लिम बहुल (बांग्लादेसी घुसपैठियो )हो गए है (जैसे ,मालदा ,उत्तेर दिनाज पुर ,कालिया चक ,रायगंज ,बर्दमान ,बालुरघाट ,२४ परगना ) जहा 70-८० प्रतिशत मुश्लिम आबादी है इन जिलो में बड़े पैमाने पर हिन्दू लडकियो का  दिन दहाड़े मुश्लिम युवको द्वारा बलात्कार किया जाता  ,पूजा करने ,मंदिरों में जाने से रोक लगे जाती है ,जबरन हिन्दुओ के घरो पर कब्ज़ा किया जा रहा है,खुले आम गौ माता काटी जा रही है   लेकिन मुख्य मंत्री ममता बनर्जी सिर्फ अपने विरोधियो को सबक सिखाने में लगी हुई है ताकि सत्ता सुख का मजा मिलता रहे .मुश्लिम वोट बैंक की राजनीती के तहत बड़े पैमाने पर मदरसा खोल कर बांग्लादेश बनाने की साजिश रची जा रही है .राष्ट्रीय उच्य पथ के दोनों किनारे हजारो की संख्या में मदरसों  का निर्माण हो रहा है जहा बड़े पैमाने पर राष्ट्र विरोधी गतिविधिओ को अंजाम दिया जाता है जिसे खुफिया तंत्र भी स्वीकार करती है लेकिन इन सब को दर किनार कर ममता सत्ता के नसे में चूर है हिन्दू मरे तो मरे उन्हें इन बातो से कोई लेना देना नहीं है .

<

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

मौत के सौदागर ?

30   वर्षीया समीना (काल्पनिक नाम ) विवाह के कई वर्षो बाद बच्चे को जन्म देने प्रसव पीड़ा को   ख़ुशी ख़ुशी सहते हुए  नर्सिंग होम पहुचती है लेकिन उसे क्या पता था की जिस   मातृत्व सुख के लिए वो इतना दर्द सह रही है उसे कुछ पल में ही खोना पड़ेगा और उसका कारन बनेगा एक स्वार्थी डोक्टर जिसे की लोग कलयुग का  भगवान समझते है/ जी हां समीना के ओप्रेसन का सौदा डाक्टर से १८०००/- (अठारह हजार) रूपये में होता है परिवार वाले रुपया जमा करते है और समीना पहुच जाती  है मौत के टेबल पर जहा उसका ओप्रेसन होता है डोक्टर लता माधव  के द्वारा लेकिन समीना के बच्चे की मौत हो जाती है और डोक्टर भी  पल्ला झाड़ लेती है समीना और उसके परिवार वाले ऊपर वाले की मर्जी समझ चुप हो जाते है लेकिन कुछ हो घंटो बाद समीना की हालत भी बिगड़ने लगती है और ऐसा देख डाक्टर साहिबा तुरंत उसे रेफर करने की बात करती है एक तो परिवार वाले पहले से ही दुखी थे बच्चे की मौत से उसपर तुरंत ही समीना को भी रेफर करने की बात सामने आती है तो और दुखी होते है लेकिन समीना की जान बचानी थी मरता क्या ना करता परिवार वाले तुरंत मेडिकल कालेज ले गए लेकिन वहा भी चिकत्सको ने रेफर कर दिया सिलिगुरी के नर्सिंग होम में इतना कुछ होते लगभग २४ घंटे का समय बीत चूका था आनन फानन में ११० किलोमीटर सिलिगुरी ले जाया गया समीना को लेकिन सिलिगुरी से भी डोक्टर की गलती बोल उसे नर्सिंग होम में रखने से माना कर दिया गया अब बेचारी समीना जीवन और मौत के बिच जूझ रही थी उसकी आँखों में मौत का खौफ साफ देखा जा सकता था .दर्द से कराहती समीना का यह दर्द मातृत्व सुख के लिए उभरा दर्द नहीं था यह दर्द उसकी मौत का था जो की धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा था परिवार वाले अभी भी समीना को बचाने के लिए जी जान से लगे थे और अब वो फिर उसी नर्सिंग होम में पहुच गई थी जहा से वो निकली थी और परिवार वाले डोक्टर  लता माधब से समीना की जान बचाने की गुहार लगा रहे थे पर डाक्टर  लता माधव अब उसे किसी भी हालत में अपने नर्सिंग होम में नहीं रखना चाहती थी ये वही डाक्टर थी जिसने अपने दलालों के माध्यम से समीना को नर्सिंग होम बुलाया था लेकिन अब समीना और उसकी जिंदगी से उसे कुछ लेना देना नहीं था खैर पुलिस आई और डाक्टर को मजबूर किया गया समीना को रखने के लिए तब जाकर समीना को पुनह नर्सिंग होम में रखा गया लेकिन  तब तक  बहुत देर हो चुकी थी समीना अब इस दुनिया में नहीं है .समीना की पूरी कहानी के पीछे  स्वार्थी चिकित्सक लता माधव थी क्योकि उन्होंने समीना की सर्जरी गलत की थी और वो सर्जन नहीं है . अब डाक्टर लता माधव के ऊपर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है इसके क्या नतीजा निकलेगा यह आप भी समझ सकते है क्योकि आये दिन पुरे देश में चिकित्सको की लापरवाही से हजारो मौत होती है हर दिन कही ना कही समीना मारी  जाती है लेकिन आज तक किसी चिकित्सक पर करवाई नहीं हुई तो इसमें भी क्या करवाई होगी लेकिन कही ना कही हमें जागरूक होने की आश्यकता है ताकि समीना को मौत से बचाया जा सके .

रविवार, 30 सितंबर 2012

डर गए नितीश ?


इन दिनों बिहार के सुसाशन बाबु यात्रा पर चल रहे है यात्रा का नाम भी बढ़िया दिया है अधिकार यात्रा और इस यात्रा का उद्देश है बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाना  आप को याद होगा परिवर्तन यात्रा से इन्होने यात्राओ का दौरा आरम्भ किया था और परिवर्तन के बाद सेवा और अब अधिकार लेकिन जितनी फजीहत इन्हें इस अधिकार यात्रा में झेलनी पड़ी उतनी फजीहत सायद ही पहले इन्होने झेली होगी जहा जहा गए नितीश बाबु वहा वहा इन्हें विरोध का सामना करना पड़ा तो क्या इन्होने जनता का विश्वाश खो दिया ?वो जनता जिशने लालू यादव के जंगल राज से मुक्ति के लिए पूर्ण बहुमत से सत्ता की कुर्शी तक पहुचाया था उस जनता के लिए क्या ये इतने बुरे हो गए की जूते चप्पल से इनका स्वागत करना पड़ रहा है तो इसके पीछे के कारणों पर जाना पड़ेगा जनता कभी ना किसी की बपौती रही है और ना रहेगी और यही बात ये भूल गए है इन्होने जितने वायदे किये सब के सब आज धुल फाक रहे है .सरकारी कार्यालयों का हाल आज भी वैसा 
ही है जैसा लालू जी के राज में हुआकरता था है तब पैसे देकर काम हो जाते थे आज पैसे देकर भी बाबुओ की जी हजुरी करनी पड़ती है जाति वाद ऐसा बढाया की दलित को दलित से ही लड़ा दिया और उसमे भी दो श्रेणी कर दी दलित और महादलित की आवाज उठाने वालो का मुह बंद कर दिया गया .सरकारी योजनाओ में धांधली तो आम बात हो गई ऊपर से जिसने सत्ता की कुर्शी तक पहुचने का काम किया उसे ही ठेंगा दिखाने लगे स्वाभिमान कुछ अधिक ही जागने लगा प्रधान मंत्री तक बनने की सोचने लगे जिसका नतीजा है आज आप का डर जाना तभी तो दरभंगा में विरोध करने वालो को उदंड कह दिया और ११ शिक्षको को बर्खास्त करने की सजा भी सुना दी किशनगंज में विरोध के डर से कार्यकर्ताओ को पास दे दिया गया ताकि विरोध करने वाले सभा स्थल तक पहुच ही ना पाए यही नहीं जो कार्य कर्ता काली रंग की टी सर्ट में गए थे उन्हें भी सभा स्थल पर जाने नहीं दिया गया ,अगर शिक्षको की बात सुन ही लेते तो आप का क्या बिगड़ जाता आप तो जनता के चुने हुए जनता के नुमायिन्दे है तब फिर इतना गुस्सा क्यों आता है आप को विरोध हजम क्यों नहीं कर पाते ऐसे कैसे प्रधान मंत्री बन पाएंगे आम देखिये तो कैसे मनमोहन बाबु इतना कुछ सुन कर भी चुप चाप रहते है .विरोध करने वालो को रविवार को भी हाजरी बनाने बुलवाया जा रहा है यह कैसा सुसाशन है आप का …